57 एकड़ पर कोयले की खुदाई या ग्रामीणों की जमीन, गिठौरी में भिड़ंत के पीछे छिपा बड़ा सवाल

तपस गुप्ता

Reporter | Updated: 02 Oct 2026, 02:54 PM IST | 1 min read
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उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

पाली जनपत के ग्राम गिठौरी में कोयला खनन को लेकर उठा विवाद अब महज मारपीट की शिकायत तक सीमित नहीं रहा। एक तरफ बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड की टीम ग्रामीणों पर हमला और धमकी के आरोप लगा रही है, तो दूसरी तरफ ग्रामीण पहले ही थाना प्रभारी के नाम आवेदन देकर कंपनी पर उनकी जमीन पर बलपूर्वक कोल माइंस का काम कराने का आरोप लगा चुके थे। सवाल अब यह है कि आखिर जिस 57.57 एकड़ जमीन को ग्रामीण करीब 50 वर्षों से अपनी खेती और घर-गृहस्थी का आधार बता रहे हैं, उसकी कानूनी स्थिति क्या है?

पहले ग्रामीणों ने लगाई गुहार, फिर दर्ज हुई शिकायत

ग्रामीणों ने अपने आवेदन में स्पष्ट कहा था कि खसरा नंबर 42, रकबा 57.57 एकड़ की जमीन पर वे वर्षों से घर बनाकर खेती करते आ रहे हैं। उनका दावा है कि भूमि संबंधी मामला पाली न्यायालय में विचाराधीन है और अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

ग्रामीणों के अनुसार, RCS A 32/25, बाबूलाल बनाम शासन प्रकरण न्यायालय में लंबित है और आवेदन में अगली पेशी 27 अक्टूबर 2026 बताई गई है। ग्रामीणों ने इसी आधार पर थाना प्रभारी से कथित खनन कार्य रुकवाने की मांग की थी।

ग्रामीणों का आरोप, जमीन पर कंपनी का दबाव

ग्रामीणों ने बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड रामपुर, छत्तीसगढ़ के महाप्रबंधक शशिधर द्विवेदी पर आरोप लगाया कि न्यायालयीन मामला लंबित होने के बावजूद मजदूरों के जरिए जमीन पर कोल माइंस का काम कराया जा रहा है। आवेदन में विरोध करने पर झगड़े और झूठे केस में फंसाने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया।

यानी कंपनी की पुलिस शिकायत सामने आने से पहले ही ग्रामीण अपनी जमीन और खनन गतिविधि को लेकर पुलिस के दरवाजे पर दस्तक दे चुके थे।

अब कंपनी की शिकायत से बदली तस्वीर

इसके बाद कंपनी की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट कमर्शियल ने आरोप लगाया कि साइट पर ग्रामीणों ने टीम का विरोध किया और डंडा, हंसिया, कुल्हाड़ी, गैती तथा पत्थर लेकर मारपीट की। शिकायत में कर्मचारियों के घायल होने और धमकी दिए जाने का भी दावा किया गया है।

शिकायत में अरुण सिंह, रामकृष्ण सिंह, राम सिंह, नरेन्द्र सिंह, सोनशाय और विजय के नाम दर्ज हैं। इनके अलावा सुशीला बाई, सुषमा बाई, छोटी बाई, मुन्नी बाई, रामप्यारी बाई, सुमन बाई, नारायण की पत्नी, ज्योति बाई, चन्दा बाई, जानकी बाई, अरुण सिंह की पत्नी, पंचू सिंह की पत्नी और विजय की पत्नी सहित गांव की अन्य महिलाओं का उल्लेख किया गया है।

कंपनी के कर्मचारी भी शिकायत में नामजद गवाह

कंपनी की शिकायत में विजय यादव, शिवम शर्मा, शक्ति प्रताप सिंह, दीपेन्द्र यादव और कमलेश कुमार रैदास के घायल होने का दावा किया गया है। वहीं शशिधर द्विवेदी, श्याम हरदहा, एस.के. गुप्ता, सौरभ मिश्रा और गंगा साहू को घटना का प्रत्यक्षदर्शी बताया गया है।

चार धाराओं में मामला दर्ज

पुलिस ने कंपनी की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 191(3), 296(b), 115(2) और 351(3) के तहत प्रकरण दर्ज किया है।

थाना प्रभारी गोविंद सिंह धुर्वे के अनुसार, कंपनी की शिकायत प्राप्त हुई है और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

असली लड़ाई एफआईआर से आगे की है

गिठौरी में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि विवाद के दौरान किसने किसके साथ मारपीट की। असली सवाल यह है कि 57.57 एकड़ जमीन की कानूनी स्थिति क्या है और न्यायालय में मामला लंबित रहने के दौरान वहां खनन गतिविधि की अनुमति और वैधानिक स्थिति क्या है।

ग्रामीणों का कहना है कि उनके घर और खेती की जमीन पर खनन उनकी आजीविका पर सीधा असर डालेगा। कंपनी अपनी ओर से भूमि को कोयला उत्खनन के लिए आवंटित होने की बात कह रही है। ऐसे में आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर भूमि रिकॉर्ड, न्यायालयीन दस्तावेज और खनन संबंधी सरकारी अनुमतियों की निष्पक्ष जांच ही इस पूरे विवाद की असली तस्वीर सामने ला सकती है।