जूरी गांव के 6 आंगनबाड़ी केंद्रों में एक साल से नहीं मिल रहा पोषण आहार, बच्चों की उपस्थिति घटी
परियोजना अधिकारी ने जताई अनभिज्ञता, कार्यकर्ताओं का दावा—वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई जानकारी; ग्रामीणों ने की जांच की मांग
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कुसमी/सीधी। सीधी जिले के महिला एवं बाल विकास परियोजना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत जूरी के छह आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को पिछले करीब एक साल से पोषण आहार एवं मध्यान्ह भोजन नहीं मिलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि समूहों द्वारा भोजन उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति लगातार घट रही है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
जानकारी के अनुसार, जूरी गांव के छह आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को नियमित रूप से पोषण आहार एवं मध्यान्ह भोजन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसका असर बच्चों के पोषण और आंगनबाड़ी केंद्रों की गतिविधियों पर पड़ रहा है। वहीं, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को मिलने वाले टेक होम राशन (टीएचआर) की व्यवस्था भी प्रभावित होने की बात सामने आई है।
एक साल से भोजन नहीं मिलने का दावा
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उषा सिंह ने बताया कि उनके केंद्र में करीब एक साल से समूहों द्वारा मध्यान्ह भोजन उपलब्ध नहीं कराया गया है। उन्होंने कहा कि इस समस्या से संबंधित जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भी दी गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। कार्यकर्ताओं के अनुसार, भोजन और पोषण आहार की व्यवस्था प्रभावित होने से बच्चे तथा गर्भवती एवं धात्री महिलाएं भी केंद्रों पर कम पहुंच रही हैं।
परियोजना अधिकारी ने कहा—जानकारी नहीं है
मामले को लेकर महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी माया गिरी से बात की गई तो उन्होंने इस समस्या की जानकारी नहीं होने की बात कही। उन्होंने संबंधित सेक्टर पर्यवेक्षक से जानकारी लेने की बात कही। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि छह आंगनबाड़ी केंद्रों में लंबे समय से पोषण आहार एवं भोजन वितरण प्रभावित है, तो इसकी जानकारी संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची और अब तक समाधान क्यों नहीं किया गया।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से की जांच की मांग
मामले को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) एवं जिला कलेक्टर का ध्यान आकृष्ट कराते हुए जूरी गांव के सभी छह आंगनबाड़ी केंद्रों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही, बच्चों को नियमित पोषण आहार एवं भोजन उपलब्ध कराने तथा गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए टीएचआर वितरण व्यवस्था सुचारु करने की मांग उठाई है।
अब देखना होगा कि महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और बच्चों के पोषण से जुड़ी इस समस्या का समाधान कब तक किया जाता है।



