आयुर्वेद की डिग्री कर रहा एलोपैथिक इलाज, bmo बोले एक महीने दे रहा समय नहीं तो हो जाएगी क्लिनिक सील

मनोज शुक्ला सम्पादक

Editor | Updated: 10 Oct 2026, 10:29 AM IST | 0 min read
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आयुर्वेद की डिग्री, इलाज एलोपैथिक दवाओं से! बहरी के आरके बिन्द क्लीनिक पर बीएमओ का छापा

सिहावल बीएमओ डॉ. रिकेश शर्मा ने मौके पर पहुंचकर की जांच, एक महीने का अल्टीमेटम; सुधार नहीं होने पर क्लीनिक सील करने की चेतावनी

बहरी क्षेत्र में संचालित आरके बिन्द क्लीनिक में शनिवार दोपहर करीब 2 बजे सिहावल बीएमओ डॉ. रिकेश शर्मा ने अपनी टीम के साथ छापा मारकर जांच की। क्लीनिक संचालक के पास आयुर्वेद की डिग्री होने के बावजूद एलोपैथिक दवाओं से इलाज किए जाने का मामला सामने आया है। जांच के दौरान मरीजों को बोतल चढ़ाने और इंजेक्शन लगाने सहित अंग्रेजी दवाओं के इस्तेमाल की बात सामने आई। बीएमओ ने क्लीनिक संचालक को एक महीने का अल्टीमेटम देते हुए कार्यप्रणाली में सुधार करने के निर्देश दिए हैं।

बीएमओ डॉ. रिकेश शर्मा ने बताया कि उन्हें क्लीनिक के अवैध रूप से संचालन और मरीजों की जान से खिलवाड़ किए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद टीम के साथ मौके पर पहुंचकर जांच की गई। उन्होंने बताया कि क्लीनिक संचालक आरके बिन्द दूसरे प्रदेश के निवासी हैं और उन्होंने यहां मकान बनाकर क्लीनिक संचालित किया है। जांच में पता चला कि उनके पास आयुर्वेद की डिग्री है, लेकिन यहां एलोपैथिक पद्धति से भी इलाज किया जा रहा है। बीएमओ ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय में कार्यप्रणाली में सुधार नहीं होने पर अगली कार्रवाई करते हुए क्लीनिक को सील किया जा सकता है।

छह साल से इलाज करा रहे ग्रामीण

क्लीनिक में इलाज कराने वाली मरीज रामरति विश्वकर्मा ने बताया कि वह पिछले छह वर्षों से यहां उपचार करा रही हैं। उनके मुताबिक, क्लीनिक में आने पर उन्हें बोतल चढ़ाई जाती है और इंजेक्शन लगाए जाते हैं। दवाएं भी क्लीनिक संचालक स्वयं उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें संचालक की डिग्री के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन गांव के कई अन्य लोग भी यहां इलाज कराने आते हैं।

15 साल से इलाज करने का संचालक का दावा

वहीं, क्लीनिक संचालक आरके बिन्द ने बताया कि वह पिछले 15 वर्षों से यहां मरीजों का इलाज कर रहे हैं। उनके अनुसार, पहले उनके पास कोई डिग्री नहीं थी, लेकिन अब उन्होंने आयुर्वेद की डिग्री प्राप्त कर ली है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके इलाज से अब तक किसी को नुकसान नहीं हुआ और मरीजों को फायदा मिल रहा है।

फिलहाल, बीएमओ की जांच के बाद क्लीनिक संचालक को एक महीने का समय दिया गया है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग निर्धारित समय के बाद क्या कार्रवाई करता है और क्लीनिक में इलाज की पद्धति व दवाओं के इस्तेमाल को लेकर क्या स्थिति सामने आती है।