बहरी-अमिलिया सोन नदी पुल के बाद अब कोदौरा पहाड़ पर भूस्खलन की मार, अधूरी मरम्मत के बीच जारी आवागमन..

राजू गुप्ता (स्टेट हेड)

Reporter | Updated: 09 Oct 2026, 02:01 PM IST | 1 min read
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AI Generated Notice / एआई जनरेटेड फोटो या खबर यह मुख्य चित्र या समाचार सामग्री कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक की सहायता से तैयार की गई है।
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बहरी-अमिलिया सोन नदी पुल के बाद अब कोदौरा पहाड़ पर भूस्खलन की मार, अधूरी मरम्मत के बीच जारी आवागमन..

सड़क बंद होने से मरीजों और आम नागरिकों की बढ़ी परेशानी, धीमी गति से चल रहे मरम्मत कार्य को लेकर क्षेत्रवासियों में नाराजगी

सीधी। जिले के बहरी-अमिलिया मार्ग पर स्थित सोन नदी का पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण पहले ही क्षेत्र की जनता को लंबे समय तक आवागमन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। अब भारी बारिश के चलते कोदौरा पहाड़ पर हुए भूस्खलन ने लोगों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ा दी हैं। पहाड़ पर भूस्खलन के बाद सड़क मार्ग को पूरी तरह बंद करना पड़ा था। बारिश थमने के बाद मरम्मत कार्य शुरू तो किया गया, लेकिन कार्य अब तक अधूरा है। इसके बावजूद इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही जारी है, जिससे स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है।

 

सोन नदी पुल क्षतिग्रस्त होने से लंबे समय तक परेशान रही जनता

गौरतलब है कि बहरी-अमिलिया स्थित सोन नदी का पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से बड़े वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके चलते क्षेत्रवासियों को कई वर्षों तक आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त खपत हुई।

भूस्खलन ने फिर बढ़ाई मुश्किलें

सोन नदी पुल की समस्या से उबरने की उम्मीद कर रहे क्षेत्रवासियों के सामने अब कोदौरा पहाड़ पर हुए भूस्खलन की चुनौती खड़ी हो गई है। भारी बारिश के कारण पहाड़ का हिस्सा प्रभावित होने से सड़क मार्ग बाधित हो गया था। बारिश बंद होने के बाद संबंधित मार्ग की मरम्मत का कार्य शुरू किया गया, लेकिन कार्य की धीमी गति के कारण अब तक पूरी तरह सुधार नहीं हो सका है। मरम्मत कार्य अधूरा रहने के बावजूद वाहनों का आवागमन जारी रहना भी चिंता का विषय बना हुआ है।

मरीजों को उत्तर प्रदेश ले जाने में हो रही परेशानी

इस मार्ग का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि सीधी जिले के इस क्षेत्र की सीमा उत्तर प्रदेश से जुड़ती है। क्षेत्र के अनेक लोग उपचार के लिए अपने मरीजों को उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में लेकर जाते हैं। ऐसे में मार्ग बाधित होने या आवागमन में रुकावट आने से मरीजों और उनके परिजनों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इससे न केवल यात्रा में अधिक समय लगता है, बल्कि परिवहन पर होने वाला खर्च भी बढ़ जाता है। आपातकालीन परिस्थितियों में यह परेशानी और भी गंभीर हो सकती है।

कछुआ चाल से चल रहा मरम्मत कार्य, जनता को शीघ्र राहत की दरकार

क्षेत्रवासियों के बीच मरम्मत कार्य की धीमी गति को लेकर असंतोष देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि महत्वपूर्ण सड़क मार्ग पर लंबे समय तक बाधा बने रहना आम जनजीवन को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में मरम्मत कार्य को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को राहत मिल सके और आवागमन सामान्य हो सके।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की मांग

अब आवश्यकता है कि संबंधित प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता से लें। मरम्मत कार्य की प्रगति की समीक्षा कर संबंधित विभाग को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने के निर्देश दिए जाने चाहिए। साथ ही, जब तक सड़क पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक वाहनों की आवाजाही के संबंध में आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाने चाहिए।

क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए शीघ्र प्रभावी कदम उठाएगा, ताकि बहरी-अमिलिया और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बार-बार आवागमन की परेशानी न झेलनी पड़े। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस दिशा में कितनी जल्दी ठोस पहल करते हैं और जनता को इस समस्या से कब तक राहत मिल पाती है।

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