डायल 1962 पशु एंबुलेंस सेवा पर वसूली के आरोप, जांच की मांग
कुसमी क्षेत्र में पशुपालकों से प्रति पशु 70 से 150 रुपये तक लेने का आरोप, धर्मदुआरी के हितग्राहियों ने बताई आपबीती
सीधी/कुसमी। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बीमार और घायल पशुओं को घर पहुंचकर उपचार उपलब्ध कराने के लिए संचालित डायल 1962 चलित पशु चिकित्सा सेवा पर कुसमी क्षेत्र में मनमानी वसूली के गंभीर आरोप लगे हैं। पशुपालकों का आरोप है कि उपचार के लिए पहुंचने वाले वाहन में पदस्थ कर्मचारियों द्वारा निर्धारित शुल्क और दवाओं के नाम पर कथित तौर पर अधिक राशि वसूली जा रही है। मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग उठने लगी है।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुसमी क्षेत्र के ग्राम धर्मदुआरी में पशुओं के उपचार के दौरान कथित वसूली का मामला सामने आया है। राम सुशील यादव की दो भैंसों एवं एक पड़िया, आशीष यादव की एक भैंस, एक पड़वा और एक पड़िया तथा लक्ष्मण यादव की एक पड़िया के उपचार के लिए डायल 1962 की गाड़ी पहुंची थी। संबंधित पशुपालकों के अनुसार, वाहन में पदस्थ कर्मचारियों द्वारा प्रति पशु 150 रुपये वाहन चार्ज और 150 रुपये वैक्सीन चार्ज के रूप में लिए गए।
पशुपालक आशीष यादव द्वारा उपचार के लिए डायल 1962 पर फोन किए जाने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि सेवा के तहत घर पहुंचकर उपचार करने के दौरान पशुपालकों से अलग-अलग मदों में राशि ली गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित शुल्क की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।
जांच हो तो सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति
क्षेत्र के अन्य पशुपालकों ने भी नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर कथित तौर पर अधिक राशि लिए जाने की जानकारी दी है। उनका कहना है कि यदि संबंधित वाहन की क्षेत्र में हुई यात्राओं, उपचार संबंधी रिकॉर्ड, रसीदों और पशुपालकों के बयानों की जांच की जाए तो मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
कुछ हितग्राहियों ने यह भी आरोप लगाया है कि शिकायत करने पर उनकी समस्या का समाधान करने के बजाय उन्हें डराया जाता है कि भविष्य में उनके पशुओं का उपचार करने वाहन नहीं भेजा जाएगा।
अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग
पशुपालकों ने मांग की है कि कुसमी पशु चिकित्सालय से संबंधित डायल 1962 चलित पशु चिकित्सा इकाई के कार्यों की जांच कराई जाए। जांच के दौरान वाहन में पदस्थ कर्मचारियों की भूमिका, पशु उपचार का रिकॉर्ड, दवाओं एवं वैक्सीन की उपलब्धता, लिए गए शुल्क और भुगतान की रसीदों की पड़ताल की जाए। साथ ही, शिकायत करने वाले हितग्राहियों के बयान गोपनीय तरीके से दर्ज किए जाएं, ताकि वे बिना किसी दबाव के अपनी बात रख सकें।
डायल 1962 सेवा का उद्देश्य बीमार और घायल पशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि सेवा के नाम पर निर्धारित नियमों के विपरीत राशि वसूली जा रही है, तो यह गंभीर जांच का विषय है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और पशुपालकों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।



