निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही उखड़ गई प्रधानमंत्री सड़क।

अमित श्रीवास्तव

Reporter | Updated: 10 Oct 2026, 05:12 AM IST | 1 min read
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निर्माण पूरा होने से पहले ही उखड़ने लगी प्रधानमंत्री सड़क, पुलिया में भी छेद

लुरघुटी नंबर-1 से ददरी डोल तक करीब 3 किलोमीटर सड़क की गुणवत्ता पर सवाल, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की जांच की मांग

कुसमी। जिले के आदिवासी बाहुल्य जनपद पंचायत कुसमी अंतर्गत ग्राम पंचायत लुरघुटी में प्रधानमंत्री सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। बैगा प्रोजेक्ट के तहत जनमन योजना अंतर्गत करोड़ों रुपये की लागत से बन रही सड़क निर्माण अवधि पूरी होने से पहले ही जगह-जगह उखड़ने और फटने लगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में निर्धारित मापदंडों की अनदेखी की गई, जिसका नतीजा अब सामने आने लगा है।

ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम लुरघुटी नंबर-1 से ददरी डोल तक करीब तीन किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण 19 अक्टूबर 2025 को शुरू हुआ था। निर्माण पूरा करने की निर्धारित तिथि 18 अक्टूबर 2026 है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य की समय-सीमा पूरी होने से पहले ही सड़क की हालत खराब होने लगी है। कई स्थानों पर गिट्टी और डामर उखड़ रहे हैं। उनका दावा है कि सड़क की परत हाथ से उखड़ रही है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उक्त सड़क का निर्माण मेसर्स गणेश प्रताप सिंह डैनिहा, सीधी द्वारा कराया जा रहा है।

पुलिया निर्माण में भी अनियमितता के आरोप

ग्रामीणों ने सड़क के साथ पुलिया निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिया निर्माण में लोहे की सरिया का उपयोग नहीं किया गया और नाले की मिट्टी मिली रेत का इस्तेमाल किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के दौरान ही इन अनियमितताओं को लेकर विरोध जताया गया था तथा समाचार पत्रों के माध्यम से जिला प्रशासन का ध्यान भी आकर्षित कराया गया, लेकिन उनकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों के मुताबिक, अब पुलिया में छेद दिखाई देने लगा है। यदि समय रहते निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच नहीं कराई गई, तो भविष्य में सड़क और पुलिया की खराब स्थिति से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड को लेकर भी सवाल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शुरुआत में निर्माण स्थल पर कार्य से संबंधित जानकारी के लिए लगाया गया बोर्ड खाली था। शिकायत के बाद बोर्ड लगाया गया, लेकिन उनके अनुसार निर्माण की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में गिट्टी के स्थान पर मिट्टीयुक्त सामग्री और डस्ट का उपयोग किए जाने का भी विरोध किया गया था।

ग्रामीणों ने फिर उठाई जांच की मांग

रामसेवक बैगा, सरपंच ग्राम पंचायत लुरघुटी ने कहा कि निर्माण कार्य के दौरान ही ग्रामीणों ने गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए थे और जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया था। इसके बावजूद ध्यान नहीं दिया गया। अब सड़क की स्थिति सामने है।

रामबदन पनिका, स्थानीय निवासी ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण में नाले की मिट्टीयुक्त रेत और गिट्टी की जगह मिट्टीयुक्त डस्ट का उपयोग किया जा रहा था। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने निर्माण कार्य की जांच कराने की मांग की।

रुद्रमणि केवट, स्थानीय निवासी ने कहा कि निर्माण कार्य में शुरू से ही मनमानी की शिकायतें सामने आ रही थीं। निर्माण स्थल पर जानकारी संबंधी बोर्ड भी खाली लगाया गया था। शिकायत के बाद बोर्ड तो लगा, लेकिन गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ।

एक अन्य ग्रामीण ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण में गिट्टी की जगह मिट्टी का उपयोग किया गया और पुलिया का निर्माण सरिया के बिना किया जा रहा था। ग्रामीणों ने इन मामलों की जांच कराने की मांग की है।

अब प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सड़क और पुलिया निर्माण की तकनीकी जांच कराने, निर्माण में इस्तेमाल सामग्री के नमूने लेकर गुणवत्ता परीक्षण कराने तथा अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित संविदाकार के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन ग्रामीणों की शिकायत पर क्या कदम उठाता है और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कब कराई जाती है।