सांदीपनि विद्यालय के निर्माण कार्य की धूल से परेशान प्राथमिक के छात्र
नवीन भवन के बगल में चल रहा निर्माण, गिट्टी-सीमेंट के बीच पढ़ने को मजबूर नौनिहाल; शिक्षा विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल
Also Read
कुसमी, सीधी। सीधी जिले के कुसमी में सांदीपनि विद्यालय सह छात्रावास के नवीन भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। वहीं, इसी निर्माण स्थल से सटे भवन में विभाग द्वारा कक्षा पहली से पांचवीं तक के प्राथमिक विद्यालय का संचालन कराया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान उड़ने वाली धूल और भारी मशीनों के शोर से छोटे-छोटे बच्चे परेशान हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग की व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय में जहां बच्चे पढ़ाई करते हैं, उसके ठीक बगल में गिट्टी रखी गई है, जबकि एक तरफ सीमेंट का स्टॉक जमा है। विद्यालय के मुख्य गेट के सामने मिक्सर मशीन सहित अन्य निर्माण उपकरण लगाए गए हैं। इसके अलावा ट्रैक्टर और जेसीबी जैसी मशीनें भी निर्माण कार्य में लगी रहती हैं। इससे एक ओर कक्षाओं में धूल पहुंचने की समस्या बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर मशीनों के शोर के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
बच्चों की सेहत और सुरक्षा पर खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि छोटे बच्चों को ऐसे वातावरण में पढ़ाना उचित नहीं है, जहां लगातार धूल उड़ रही हो और भारी मशीनें चल रही हों। धूल के लंबे समय तक संपर्क में रहने से बच्चों को सांस संबंधी परेशानी होने की आशंका भी जताई जा रही है। वहीं, निर्माण स्थल पर मशीनों और वाहनों की आवाजाही के बीच किसी अप्रिय घटना की आशंका से भी अभिभावक चिंतित हैं।
अभिभावकों की शिकायत के बाद सामने आई स्थिति
अभिभावकों के अनुसार, इस समस्या को लेकर कई बार मीडिया को जानकारी दी गई। इसके बाद जब मीडिया मौके पर पहुंचा, तो विद्यालय के आसपास निर्माण सामग्री, धूल और भारी मशीनों के संचालन की स्थिति सामने आई। इससे ग्रामीणों की शिकायतों को बल मिला है।
एसडीएम से विद्यालय शिफ्ट कराने की मांग
ग्रामीणों ने कुसमी एसडीएम से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक विद्यालय को तत्काल किसी सुरक्षित वैकल्पिक स्थान पर संचालित कराया जाए। उनका कहना है कि निर्माण कार्य अपनी जगह जरूरी है, लेकिन इसकी वजह से छोटे बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य से समझौता नहीं होना चाहिए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया और बच्चे लगातार धूल के संपर्क में रहे, तो उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन और शिक्षा विभाग इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेते हैं और नौनिहालों को सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराते हैं।



