सीधी जिला पंचायत के 29हजार रूपये के चाय काफी के बिल में उठ रहे सवाल।

अमित श्रीवास्तव

Reporter | Updated: 06 Oct 2026, 04:37 AM IST | 1 min read
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जिला पंचायत में 29 हजार की चाय-कॉफी के बिल पर उठे सवाल।

दुकानों के बजाय अलग-अलग व्यक्तियों के नाम भुगतान होने पर स्थानीय लोगों ने मांगी जांच

सीधी। जिला पंचायत सीधी में चाय-कॉफी के नाम पर करीब 29 हजार रुपये के भुगतान का मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। उपलब्ध भुगतान विवरण के अनुसार चाय-कॉफी से संबंधित कुल 28,868 रुपये का भुगतान किया गया है। इसमें अख्तर खान के नाम 9,188 रुपये तथा बिहारी सिंह के नाम 19,680 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि चाय और कॉफी की खरीदी मनोहर चाय सीधी एवं इंडियन कॉफी हाउस/कॉफी वर्कर्स कोपरेटिव लिमिटेड जैसी दुकानों से की गई थी, तो भुगतान संबंधित फर्म या प्रतिष्ठान के नाम से किए जाने के बजाय अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर क्यों किया गया। इसी को लेकर लोगों ने भुगतान की प्रक्रिया और बिलों की वास्तविकता की जांच की मांग उठाई है।

*बिलों की प्रक्रिया पर भी सवाल*

मामले में भुगतान से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार संबंधित बिल पर जिला पंचायत के लेखा अधिकारी के हस्ताक्षर दिखाई दे रहे हैं, जबकि भुगतान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के डिजिटल सिग्नेचर (DSC) के माध्यम से किया जाता है। ऐसे में बिल स्वीकृति से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की जा रही है।

*पंचायत दर्पण पोर्टल पर भुगतान की जानकारी उपलब्ध*

स्थानीय लोगों का कहना है कि मध्य प्रदेश पंचायत दर्पण पोर्टल का उद्देश्य पंचायतों में होने वाले भुगतान और वित्तीय गतिविधियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। पोर्टल पर बिल क्रमांक सहित भुगतान से संबंधित जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था है, जिससे आम नागरिक भी संबंधित भुगतान की जानकारी देख सकते हैं।

इसके बावजूद जिला पंचायत में भुगतान पत्रक तैयार कर भुगतान किए जाने की प्रक्रिया को लेकर लोगों ने संदेह जताया है। हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

स्थानीय लोगों ने सीधी कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ का ध्यान इस मामले की ओर आकृष्ट कराते हुए संबंधित बिलों, भुगतान पत्रकों, वाउचरों, फर्मों के नाम तथा भुगतान प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भुगतान नियमानुसार किया गया है या नहीं।