सीधी की एक जमीन पर 4 दावे,आखिर किसकी है ये जमीन

मनोज शुक्ला सम्पादक

Editor | Updated: 06 Oct 2026, 04:36 AM IST | 1 min read
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एक ही जमीन पर 4 दावे, 12 प्रधानमंत्री आवास पर स्टे से चढ़ रहा संकट

ग्रामीणो ने बोला 100 साल से रह रहे हम, वन विभाग और राजस्व विभाग भी जमीन को अपना बता रहे,बैजनाथ द्विवेदी के दावे पर उठे सवाल

एमपी के सीधी जिले के बहरी क्षेत्र में जमीन के अधिकार को लेकर विवाद गहराता हुआ नजर आ रहा है। जहाँ एक ही जमीन पर ग्रामीणों के साथ बैजनाथ द्विवेदी, वन विभाग और राजस्व विभाग अपने-अपने दावे भी कर रहे हैं। इस विवाद के चलते जगवती कोल, रामसखा कोल, शकुंतला कोल सहित करीब 12 परिवारों के प्रधानमंत्री आवास अटक गए हैं। जहाँ अब ग्रामीणों का आरोप है कि बैजनाथ द्विवेदी ने जमीन पर अपना हक जताते हुए तहसीलदार बहरी न्यायालय से स्टे हासिल कर लिया है जिसके बाद वर्षों से यहां रह रहे परिवारों के सामने घर बचाने का संकट भी उत्पन्न हो गया है।

गांव के रामसखा कोल का कहना है कि उनके जैसे 40 से अधिक परिवार इस विवाद से प्रभावित हैं। उनका आरोप है कि उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की जाती है तथा घर तोड़ने का प्रयास भी किया गया। उनका यह भी दावा है कि वे इस स्थान पर 100 साल से अधिक समय से रह रहे हैं। इस जगह पर पहले यहां जंगल हुआ करता था, जिसके बाद तत्कालीन सीधी कलेक्टर अजीत जोगी के कार्यकाल में उनके परिवारों को पट्टे भी दिए थे।

ग्रामीणों के साथ गांव के सरपंच राजेश साकेत का आरोप है कि बैजनाथ द्विवेदी के नाम पहले करीब 20 एकड़ जमीन थी, लेकिन अब 250 एकड़ से अधिक जमीन उनके नाम होने का दावा किया जा रहा है। जहाँ इनमें कई जमीनें पूर्व में मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज होने की बात भी कही गई है। वही सरपंच के मुताबिक इस मामले में तहसीलदार को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

85 वर्षीय बुजुर्ग भागीरथी साकेत ने कहा कि उनका जन्म इसी स्थान पर हुआ और अब जीवन के अंतिम पड़ाव में उन्हें अपने ही घर से बेघर होने का डर सता रहा है।

इस मामले में बैजनाथ द्विवेदी से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने सामने आकर कोई जवाब नहीं दिया।

एक जमीन पर चार दावे

अब इस मामले मे बहरी रेंज की रेंजर कविता साकेत ने बताया कि संबंधित जमीन वन विभाग के रिकॉर्ड में जंगल के रूप में दर्ज है और विभाग के खसरे में आती है। वहीं अब तहसीलदार बहरी हिमांशु शुक्ला ने इसे राजस्व विभाग की करीब 15 एकड़ जमीन बताते हुए कहा कि यह पहले मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज हुआ करती थी लेकिन अब बैजनाथ द्विवेदी के नाम दिखाई दे रही है। उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही।

वही अब ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक ही जमीन आखिर किसकी है, लेकिन ग्रामीण इसे वर्षों पुराना निवास और पट्टे की जमीन बता रहे हैं, वन विभाग इसे अपनी जमीन बता रहा है, जबकि राजस्व विभाग भी इसे शासकीय भूमि बता रहा है और रिकॉर्ड में बैजनाथ द्विवेदी का नाम सामने आने की बात कही जा रही है। जहाँ इस विवाद के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ रुकना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।