सीधी की राजनीति में रेल उद्घाटन पर सियासी सवाल! 10 साल सांसद रहीं रीती पाठक बोलीं—“मुझे आमंत्रण तक नहीं मिला”
चुरहट तक रेल पहुंचने की परियोजना में अपनी भूमिका का किया जिक्र, ऐतिहासिक समारोह से दूरी और आमंत्रण का मुद्दा बना जिले में राजनीतिक चर्चा का केंद्र
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राजू गुप्ता प्रदेश हेड सीधी 24 अक्टूबर 2026। सीधी जिले में रेल सेवा की शुरुआत जहां विकास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है, वहीं उद्घाटन समारोह में पूर्व सांसद एवं वर्तमान सीधी विधायक रीती पाठक की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। दस वर्षों तक सांसद रहीं रीती पाठक ने अपने कार्यकाल के दौरान किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा, “10 साल सांसद रहते हुए मैंने जो काम किए हैं, उसे जनता अच्छी तरह जानती है… लेकिन मुझे आमंत्रण तक नहीं दिया गया!”
24 अक्टूबर को रीवा–चुरहट रेलखंड का लोकार्पण और देवेंद्रनगर–चुरहट ट्रेन सेवा का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
रेल की सौगात, लेकिन सियासी चर्चा आमंत्रण पर!
ललितपुर–सिंगरौली रेल परियोजना सीधी संसदीय क्षेत्र के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। रीती पाठक ने अपने सांसद कार्यकाल के दौरान इस परियोजना को लेकर संसद में आवाज उठाई और रेल कनेक्टिविटी के विस्तार का मुद्दा उठाया था। उपलब्ध लोकसभा रिकॉर्ड में भी इस परियोजना से जुड़े उनके वक्तव्यों का उल्लेख बताया गया है।
ऐसे में चुरहट तक रेल सेवा शुरू होने के ऐतिहासिक अवसर पर उनका समारोह में शामिल नहीं होना और आमंत्रण नहीं मिलने संबंधी बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल आमंत्रण से जुड़ा मामला है या इसके पीछे कोई प्रशासनिक अथवा प्रोटोकॉल संबंधी कारण है? फिलहाल इसकी आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं हुई है।
विकास का श्रेय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर सवाल
रेल सेवा की शुरुआत निश्चित रूप से क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लेकिन इस उपलब्धि के साथ परियोजना के लिए पूर्व में किए गए प्रयासों, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और उद्घाटन समारोह में उनकी भागीदारी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
रीती पाठक के बयान के बाद जिले की राजनीति में यह चर्चा तेज है कि जिस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अपने सांसद कार्यकाल में प्रयास किए, उसी के ऐतिहासिक पड़ाव पर उन्हें आमंत्रित क्यों नहीं किया गया? हालांकि, इस संबंध में आयोजकों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
अब बड़ा सवाल—सीधी जिले की इस ऐतिहासिक रेल सौगात पर चर्चा विकास की होनी चाहिए या जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने-न करने की राजनीति की?



