सेवा सेतु अभियान शिविर मड़वास में खानापूर्ति के आरोप..

राजू गुप्ता (स्टेट हेड)

Reporter | Updated: 03 Oct 2026, 01:48 PM IST | 1 min read
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सेवा सेतु अभियान शिविर मड़वास में खानापूर्ति के आरोप

प्रचार-प्रसार के अभाव में सरकारी योजना का लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचा, शिविर में बेहद कम पंजीयन से व्यवस्था पर उठे सवाल

सीधी मड़वास, 3 अक्टूबर 2026।
जनपद पंचायत मझौली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत मड़वास में शनिवार को आयोजित सेवा सेतु अभियान के तहत खंड स्तरीय शिविर पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिविर का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं किए जाने के कारण बड़ी संख्या में ग्रामीणों को इसकी जानकारी ही नहीं मिल सकी और शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ जरूरतमंद हितग्राहियों तक पहुंचने से पहले ही शिविर महज औपचारिकता बनकर रह गया।

 

बताया गया कि जिला प्रशासन के निर्देशानुसार आयोजित इस शिविर में मझौली एसडीएम एवं नोडल अधिकारी तथा जनपद पंचायत मझौली की सीईओ सुरभि श्रीवास्तव सहायक नोडल अधिकारी के रूप में मौजूद रहीं। बावजूद इसके शिविर में पंजीयन कराने वाले लोगों की संख्या बेहद कम रही।

 

उपलब्ध जानकारी के अनुसार शिविर में सात से आठ लोगों द्वारा पंजीयन/आवेदन किए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि स्वास्थ्य विभाग से संबंधित सेवाओं में लगभग 135 लोगों ने उपचार का लाभ लिया। पंजीयन के आंकड़ों में अंतर को लेकर भी स्पष्टता की आवश्यकता है।

प्रचार-प्रसार नहीं हुआ तो ग्रामीणों तक योजना कैसे पहुंचेगी?

मड़वास आदिवासी अंचल से जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अनेक परिवार शासन की योजनाओं और प्रशासनिक सेवाओं का लाभ लेने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। ऐसे में सेवा सेतु जैसे अभियान का उद्देश्य ही यह है कि प्रशासन स्वयं ग्रामीणों तक पहुंचे और उनकी समस्याओं का मौके पर समाधान किया जाए।

लेकिन यदि शिविर आयोजित होने की जानकारी ही ग्रामीणों तक नहीं पहुंचेगी, तो फिर इसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक कैसे पहुंचेगा? यही सवाल अब स्थानीय ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

व्हाट्सएप ग्रुप तक सीमित रहा प्रचार-प्रसार?

जब शिविर में बेहद कम पंजीयन को लेकर जनपद पंचायत मझौली की सीईओ सुरभि श्रीवास्तव से प्रचार-प्रसार के संबंध में जानकारी ली गई तो उनके अनुसार कार्यक्रम की जानकारी व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से साझा की गई थी तथा पत्रकारों को भी कार्यक्रम की जानकारी दी जानी थी।

अब सवाल यह है कि हजारों की आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्र में केवल व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से सूचना प्रसारित करना क्या पर्याप्त प्रचार-प्रसार माना जा सकता है? क्या ग्राम पंचायत स्तर पर मुनादी, सूचना-पत्र, पोस्टर, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं मैदानी कर्मचारियों के माध्यम से ग्रामीणों को सूचना नहीं दी जानी चाहिए थी?

हजारों की आबादी, लेकिन पंजीयन मुट्ठीभर

सेवा सेतु अभियान का मूल उद्देश्य सरकारी योजनाओं और सेवाओं को आमजन के द्वार तक पहुंचाना है। ऐसे में मड़वास जैसे बड़े ग्रामीण क्षेत्र में यदि शिविर के दौरान पंजीयन की संख्या महज सात-आठ तक सीमित रहती है, तो यह शिविर की पहुंच और प्रचार व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

शिविर के आयोजन में प्रशासनिक संसाधन, कर्मचारी, व्यवस्थाएं और अन्य खर्च हुए होंगे। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि अधिकांश जरूरतमंद ग्रामीणों को शिविर की जानकारी ही नहीं मिली तो आयोजन पर खर्च हुए सरकारी संसाधनों का वास्तविक लाभ कितने लोगों तक पहुंच पाया?

सरकारी राशि के उपयोग की हो समीक्षा

स्थानीय स्तर पर अब मांग उठ रही है कि सेवा सेतु अभियान के तहत मड़वास में आयोजित शिविर की व्यवस्था, प्रचार-प्रसार, पंजीयन, विभागवार लाभार्थियों तथा आयोजन पर हुए खर्च का विवरण सार्वजनिक किया जाए।

यदि प्रचार-प्रसार के लिए सरकारी स्तर पर राशि खर्च की गई है तो उसका उपयोग किस माध्यम से और कितना किया गया, इसकी भी जानकारी सामने आनी चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिविर केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित रहा या वास्तव में शासन की सेवाएं जरूरतमंद ग्रामीणों तक पहुंचीं।

जनता को चाहिए जवाब

सेवा सेतु अभियान का उद्देश्य सरकारी योजनाओं को कागजों से निकालकर आम जनता तक पहुंचाना है। ऐसे में मड़वास शिविर में कम पंजीयन और प्रचार-प्रसार को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब प्रशासन को देना चाहिए।

ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसे शिविरों की जानकारी गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचे, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों को मिल सके।

अब देखना यह है कि प्रशासन मड़वास के इस सेवा सेतु अभियान शिविर में कम पंजीयन और प्रचार-प्रसार से जुड़े सवालों पर क्या जवाब देता है।