सिंगरौली की रेत, सीधी की टूट रही सड़कें और खतरे में है गोपद पुल।
टूटे पुल के नीचे मिट्टी भरकर संचालित किया जा रहा आवागमन, भारी वाहनों का वीडियो वायरल; ग्रामीणों ने मरम्मत की उठाई मांग
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सीधी। जिले के गोतरा गांव में गोपद नदी पर बने क्षतिग्रस्त पुल से रेत से भरे भारी वाहनों की आवाजाही लगातार जारी है। पुल का किनारा टूटने और क्षतिग्रस्त हिस्से के नीचे मिट्टी भरकर आवागमन संचालित किए जाने से दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है। इस पुल से गुजरते रेत से भरे भारी वाहनों का वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें पुल की स्थिति और भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, सिंगरौली जिले की हरदी रेत खदान से रेत लेकर भारी वाहन गोतरा स्थित गोपद नदी के पुल से होते हुए सीधी की ओर आ रहे हैं। खदान का संचालन सहकार ग्लोबल कंपनी द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन वाहनों में ओवरलोडिंग के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। यदि क्षतिग्रस्त पुल से लगातार भारी वाहनों का आवागमन जारी रहा, तो किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
*टूटे पुल के नीचे मिट्टी भरकर जारी है आवागमन*
पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से के नीचे मिट्टी भरकर आवागमन संचालित किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में पुल की वास्तविक स्थिति, उसकी भार क्षमता और मरम्मत की आवश्यकता का तकनीकी आकलन किया जाना जरूरी है। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से स्थिति और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
*पहले भी प्रकाशित हो चुकी है पुल क्षतिग्रस्त होने की खबर*
गोपद नदी के इस पुल के क्षतिग्रस्त होने की खबर पहले भी प्रकाशित की जा चुकी है। इसके बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही जारी रहने से संबंधित विभागों की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने पुल की तत्काल मरम्मत कराने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।
*सिंगरौली से सीधी तक रेत परिवहन, निगरानी पर सवाल*
हरदी रेत खदान से सीधी की ओर रेत परिवहन में लगे भारी वाहनों के वजन और निर्धारित नियमों के पालन की जांच आवश्यक है। यदि वाहन ओवरलोड पाए जाते हैं, तो संबंधित विभागों को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, पुल की तकनीकी जांच होने तक भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर सुरक्षा संबंधी उचित निर्णय लिया जाना जरूरी है।
*हादसे के बाद जागेगा प्रशासन?*
क्षतिग्रस्त पुल से भारी वाहनों की आवाजाही जारी रहने के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार विभाग कब निरीक्षण करेंगे? लोक निर्माण विभाग अथवा संबंधित पुल एजेंसी को पुल की स्थिति का तत्काल आकलन करना चाहिए। वहीं, खनिज और परिवहन विभाग को रेत से भरे वाहनों के वजन और परिवहन नियमों की जांच करनी चाहिए।
*ग्रामीणों की मांग है कि किसी बड़ी* दुर्घटना का इंतजार किए बिना पुल की मरम्मत कराई जाए और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी समय रहते कार्रवाई करते हैं या फिर किसी हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी।



