टूटे पुल से 90 टन रेत के परिवहन का आरोप, प्रशासन को अल्टीमेटम,29 अक्टूबर से चक्काजाम..

राजू गुप्ता (स्टेट हेड)

Reporter | Updated: 23 Oct 2026, 05:05 AM IST | 0 min read
Share:

टूटे पुल से 90 टन रेत के परिवहन का आरोप, प्रशासन को अल्टीमेटम,29 अक्टूबर से चक्काजाम..

सीधी
गोपद नदी का क्षतिग्रस्त पुल, उस पर भारी वाहनों की आवाजाही और 80 से 90 टन तक रेत लदे वाहनों के गुजरने के आरोप ने क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुसमी क्षेत्र के ग्राम भदौरा निवासी आनंद सिंह ददुआ ने इस मामले में कलेक्टर को आवेदन सौंपकर कथित अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो 29 अक्टूबर 26 से भदौरा रेलवे गेट के पास चक्काजाम आंदोलन किया जाएगा।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि सिंगरौली जिले की हरदी रेत खदान का ठेका सहकार ग्लोबल कंपनी को मिलने के बाद गोपद नदी के क्षतिग्रस्त पुल से रेत का परिवहन किया जा रहा है।
ग्रामीणों का दावा है कि पुल के बीच भारी वाहन खड़े कर मशीनों के माध्यम से रेत लोड की जाती है। पुल के किनारे टूटे होने और नीचे पावा भरकर आवागमन जारी रहने के बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही पर सवाल उठाए गए हैं।
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो किसी बड़े हादसे की स्थिति बन सकती है।

प्रधानमंत्री सड़क पर भी भारी वाहनों का दबाव

आवेदन में गोतरा से महखोर मार्ग पर स्थित पुल के अलावा प्रधानमंत्री सड़क से भारी मात्रा में रेत लदे वाहनों के गुजरने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, लगातार भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क को नुकसान पहुंच रहा है और स्थानीय व्यापारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

एक सप्ताह की मोहलत, फिर चक्काजाम की चेतावनी

आनंद सिंह ददुआ ने प्रशासन से एक सप्ताह के भीतर मामले की जांच कर कथित अवैध उत्खनन और परिवहन पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में 29 अक्टूबर 26 से भदौरा रेलवे गेट के पास चक्काजाम आंदोलन किया जाएगा।
आवेदन की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक सीधी, अनुविभागीय अधिकारी कुसमी, तहसीलदार कुसमी तथा कुसमी एवं मड़वास थाना प्रभारियों को भी भेजी गई है।

अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर

शिकायत में क्षतिग्रस्त पुल, भारी वाहनों की आवाजाही और कथित अवैध रेत परिवहन को लेकर गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, खनिज विभाग और संबंधित सड़क एवं पुल निर्माण एजेंसियां मामले की जांच कर क्या कदम उठाती हैं।