Singrauli News: भ्रष्टाचार और मनमानी का के युग का अंत, उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार बर्खास्त

By: Editor

On: Friday, June 12, 2026 1:36 PM

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सिंगरौली: शासन ने अंततः सिंगरौली के उप पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) अशोक सिंह परिहार को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। लंबे समय से भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोपों से घिरे परिहार की विदाई के साथ ही सिंगरौली के पंजीयन कार्यालय में व्याप्त कथित ‘अवैध कमाई के साम्राज्य’ पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

 

अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का लंबा दौर

 

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि पिछले 7-8 वर्षों से सिंगरौली में जमे अशोक सिंह परिहार ने पद पर रहते हुए अकूत संपत्ति अर्जित की है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी नियमों को ताक पर रखकर कई फर्जी रजिस्ट्रियां कीं। बताया जा रहा है कि वेंडरों द्वारा ली जाने वाली मोटी रकम में इनका बड़ा हिस्सा तय होता था। एक रजिस्ट्री में वेंडर के ₹5000 के चार्ज में ₹3000 तक इनका हिस्सा होने की चर्चाएं आम रही हैं। इतना ही नहीं, जेल में बंद अपराधियों के नाम पर रजिस्ट्री करने के मामलों में भी इनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। इनके खिलाफ लोकायुक्त में भी मामले विचाराधीन होने की जानकारी है।

 

सत्ता का अहंकार और प्रशासन को चुनौती

 

परिहार के बारे में यह भी चर्चा जोरों पर थी कि ‘सीएम हाउस’ तक पहुंच का दावा कर वे स्वयं को कानून से ऊपर समझते थे। इस अहंकार के चलते वे अक्सर अपने उच्च अधिकारियों को भी नजरअंदाज करते थे। बताया जाता है कि हाल ही में एक वरिष्ठ अधिकारी से उलझना उन्हें भारी पड़ गया, जो उनकी बर्खास्तगी का तात्कालिक कारण बना।

 

जांच में दोषी पाए गए और बर्खास्तगी का आधार

 

भले ही उन पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप रहे हों, लेकिन शासन ने उन्हें मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1961 के नियम 6 के उल्लंघन के आधार पर बर्खास्त किया है। विभागीय जांच में यह प्रमाणित हो गया कि उनकी तीसरी संतान का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। 26 जनवरी 2001 के बाद दो से अधिक संतान होने के कारण वे सरकारी सेवा में बने रहने के पात्र नहीं थे।

 

जांच अधिकारी ने उनके इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया कि उन्हें इस नियम की जानकारी नहीं थी, क्योंकि वे 1992 से ही नियमित सरकारी सेवा में कार्यरत थे। अंततः, मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 10(8) के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है।

 कर्मों का फल

 

यह कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि पद और रसूख कितना भी बड़ा क्यों न हो, अंततः नियमों की लक्ष्मण रेखा पार करने वालों को अपने कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है। सिंगरौली की जनता के बीच यह बर्खास्तगी भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़े सबक के रूप में देखी जा रही है।

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