सिंगरौली। जिले के ग्राम कोयलखूंथ में राखड़ भराई कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि अदानी पावर प्लांट से संबंधित राखड़ भराई एवं भूमि समतलीकरण कार्य में ठेकेदार विजय नारायण शाह और मुंशी निरंजन सोनी द्वारा निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण पिछले दो वर्षों से गांव के किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, राखड़ भराई के बाद पर्यावरणीय एवं सुरक्षा मानकों के तहत लगभग एक मीटर मोटी मिट्टी की परत डाली जानी थी, ताकि राखड़ बाहर न निकले और आसपास की कृषि भूमि सुरक्षित रहे। लेकिन मौके पर केवल मिट्टी की पतली परत डालकर कार्य पूरा दिखा दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर राखड़ आज भी खुली दिखाई दे रही है।
बारिश में बहकर खेतों तक पहुंच रही राखड़
ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य स्थल के चारों ओर सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल या अन्य सुरक्षात्मक व्यवस्था भी नहीं की गई। इसका परिणाम यह है कि बारिश के दौरान राखड़ बहकर सीधे किसानों के खेतों तक पहुंच रही है। इससे खेतों की उर्वरता प्रभावित हो रही है और फसलों को भी नुकसान हो रहा है।
गांव के किसानों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में यही स्थिति बनती है। राखड़ के बहाव से खेतों में मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे उत्पादन पर भी असर पड़ता है। कई किसानों ने इस समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदारों को शिकायतें भी दीं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।
ग्रामीणों ने वीडियो बनाकर भेजी शिकायत
मामले को लेकर ग्रामीणों ने मौके के वीडियो और तस्वीरें साझा करते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में और अधिक कृषि भूमि प्रभावित हो सकती है।
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण विभाग एवं संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी जांच हो कि कार्य निर्धारित मानकों और स्वीकृत शर्तों के अनुसार हुआ है या नहीं। यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए और प्रभावित किसानों को राहत प्रदान की जाए।
क्षत्रिय कुलावंत संगठन ने उठाई आवाज
क्षत्रिय कुलावंत संगठन ने भी ग्रामीणों की शिकायत को गंभीर बताते हुए प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि किसानों की आजीविका और पर्यावरण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। संगठन ने मांग की है कि संबंधित स्थल का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए तथा दोषी पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
नोट: इस समाचार में उल्लेखित आरोप ग्रामीणों द्वारा लगाए गए हैं। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।







