इतिहास के पन्नों में दर्ज है रीवा रियासत, भीषण अकाल के दौर में शुरू हुआ निर्माण

मनोज शुक्ला सम्पादक

Editor | Updated: 24 Oct 2026, 01:43 PM IST | 1 min read
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अकाल की मार से जूझती प्रजा को रोजगार देने के लिए बनवाया गया था रीवा का वेंकट भवन, महाराजा वेंकटरमण सिंह ने बाघों के शिकार पर भी लगाई थी रोक

इतिहास के पन्नों में दर्ज है रीवा रियासत की जनकल्याणकारी पहल, भीषण अकाल के दौर में शुरू हुआ था ऐतिहासिक भवन का निर्माण

रीवा। मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र का इतिहास केवल राजघरानों, महलों और रियासतों की कहानियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संकट के समय आम जनता को राहत देने की पहल भी दर्ज है। रीवा रियासत के महाराजा वेंकटरमण सिंह से जुड़ा ऐतिहासिक वेंकट भवन इसका एक प्रमुख उदाहरण माना जाता है। बताया जाता है कि उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में जब रीवा राज्य को भीषण अकाल का सामना करना पड़ा, तब लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस भव्य भवन के निर्माण का काम शुरू कराया गया था।

इतिहास संबंधी उपलब्ध विवरणों के अनुसार, रीवा राज्य में 1896-97 और 1899-1900 के दौरान गंभीर अकाल पड़ा था। इन परिस्थितियों में खेती-किसानी पर निर्भर परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया था। ऐसे समय में निर्माण कार्य के माध्यम से लोगों को मजदूरी उपलब्ध कराना राहत का एक महत्वपूर्ण जरिया बना। वेंकट भवन का निर्माण इसी पहल से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इसके निर्माण की शुरुआत और अकाल की तारीखों को लेकर अलग-अलग स्रोतों में कुछ अंतर मिलता है।

अकाल के दौर में शुरू हुआ निर्माण

रीवा शहर में स्थित वेंकट भवन अपनी विशिष्ट स्थापत्य शैली के लिए जाना जाता है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के मुताबिक, भवन का निर्माण 1896 के आसपास शुरू हुआ और इसे तैयार होने में लगभग 13 वर्ष लगे। वर्ष 1907-08 के आसपास इसके पूरा होने का उल्लेख मिलता है। इसकी वास्तुकला में सुंदर नक्काशी, सजावटी संरचनाओं और खुले हिस्सों का विशेष स्थान है।

भवन के निर्माण से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे केवल राजसी वैभव के प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि अकाल के समय रोजगार उपलब्ध कराने की पहल के रूप में भी याद किया जाता है। आज यह इमारत रीवा की ऐतिहासिक विरासत और तत्कालीन रियासत के स्थापत्य कौशल की पहचान बनी हुई है।

बाघों के शिकार पर प्रतिबंध का भी उल्लेख

महाराजा वेंकटरमण सिंह के शासनकाल से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारियों में बाघों के शिकार पर प्रतिबंध लगाने का भी उल्लेख मिलता है। यह पहल उस दौर के वन्यजीव संरक्षण के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। हालांकि, प्रतिबंध की सटीक तारीख, उसके दायरे और लागू करने की व्यवस्था के बारे में ठोस प्राथमिक दस्तावेजों के आधार पर अधिक जानकारी की आवश्यकता है।

इतिहास की विरासत है वेंकट भवन

वेंकट भवन आज भी रीवा के गौरवशाली अतीत की याद दिलाता है। इसकी कहानी यह बताती है कि ऐतिहासिक इमारतें केवल वास्तुकला या राजशाही की पहचान नहीं होतीं, बल्कि उनके निर्माण के पीछे तत्कालीन सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां भी जुड़ी हो सकती हैं। अकाल जैसे कठिन दौर में रोजगार उपलब्ध कराने की पहल से जुड़ा यह भवन आज भी इतिहास, जनजीवन और विरासत के आपसी संबंध को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।