मुरूम की कथित चोरी पर खनिज विभाग मौन क्यों,कुर्सी पर अधिकारी, जमीन से गायब हो रही खनिज संपदा

तपस गुप्ता

Reporter | Updated: 22 Oct 2026, 03:30 PM IST | 1 min read
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उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

जिले में खनिज संपदा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले जिला खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मानपुर जनपद पंचायत के ग्राम गोवर्दे में सोन नदी के किनारे स्थित शासकीय भूमि से कथित तौर पर पोकलेन मशीन लगाकर मुरूम उत्खनन किए जाने की शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता रवि सेन ने कलेक्टर से लेकर खनिज विभाग तक कार्रवाई की मांग की है। अब सवाल यह है कि जब सरकारी जमीन से खनिज निकालने की शिकायत सामने आ रही है, तो जिला खनिज अधिकारी की टीम मौके पर पहुंचकर वास्तविकता स्पष्ट क्यों नहीं करती।

सरकारी जमीन पर उत्खनन का आरोप, जिम्मेदारी किसकी

शिकायत के अनुसार, ग्राम गोवर्दे में सोन नदी के किनारे स्थित शासकीय भूमि खसरा नंबर 591/1/1/1/1, रकबा 6.0710 हेक्टेयर से मुरूम निकाले जाने का आरोप है। शिकायत में आशंका जताई गई है कि पोकलेन मशीन से निकाली गई मुरूम का इस्तेमाल सोन नदी में रेत उत्खनन के लिए पहुंच मार्ग बनाने में किया जा रहा है। इस मामले में रेत ठेकेदार बाबा महाकाल मिनरल्स का नाम सामने आया है।

हालांकि, संबंधित भूमि से मुरूम उत्खनन की अनुमति और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में जिला खनिज अधिकारी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विभाग ने मौके का निरीक्षण किया। क्या उत्खनन की मात्रा नापी गई। क्या अनुमति संबंधी दस्तावेजों की जांच हुई? यदि नहीं, तो शिकायत के बाद कार्रवाई में देरी का कारण क्या है?

15 सितंबर को आवेदन, फिर भी सीमांकन पर सवाल

शिकायतकर्ता रवि सेन के मुताबिक, 15 सितंबर 2026 को कलेक्टर कार्यालय में आवेदन देकर बाबा महाकाल मिनरल्स के पक्ष में जिले में स्वीकृत सभी रेत खदानों का एक अक्टूबर से पहले सीमांकन और खूंटाबंदी कराने की मांग की गई थी। इसके बावजूद शिकायत में दावा किया गया है कि संबंधित खदानों के स्थलों पर स्पष्ट सीमा चिह्न दिखाई नहीं दे रहे हैं।

यदि सीमांकन और खूंटाबंदी नहीं हुई है, तो स्वीकृत खदानों की निगरानी किस आधार पर की जा रही है। और यदि विभाग यह प्रक्रिया पूरी कर चुका है, तो उसकी रिपोर्ट और मौके पर स्थापित सीमा चिह्नों की स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती। इन सवालों का जवाब जिला खनिज अधिकारी को देना चाहिए।

खनिज विभाग की निगरानी कहां

खनिज विभाग का काम केवल खदानों को स्वीकृति देने या कागजी रिकॉर्ड संभालने तक सीमित नहीं है। स्वीकृत सीमा के भीतर उत्खनन सुनिश्चित करना, अवैध खनन की शिकायतों की जांच करना और सरकारी राजस्व की सुरक्षा करना भी विभाग की जिम्मेदारी है।

सोन नदी किनारे मुरूम उत्खनन के आरोपों के बीच विभाग की सक्रियता और निगरानी व्यवस्था की जांच जरूरी हो गई है। यदि मौके पर बिना अनुमति उत्खनन हुआ है, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार प्रकरण दर्ज कर जुर्माना लगाने और राजस्व क्षति की वसूली की कार्रवाई होनी चाहिए। केवल जांच का आश्वासन देकर मामले को ठंडे बस्ते में डालना किसी भी स्थिति में उचित नहीं होगा।

अब जवाबदेही तय होगी या मामला फाइलों में दबेगा

रवि सेन ने मांग की है कि खनिज एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम मौके पर जाकर मुरूम उत्खनन की माप-जोख करे, पंचनामा तैयार करे और बाबा महाकाल मिनरल्स के पक्ष में स्वीकृत सभी रेत खदानों का विधिवत सीमांकन एवं खूंटाबंदी कराए। साथ ही 15 सितंबर को दिए गए आवेदन पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए।

सरकारी खनिज संपदा किसी ठेकेदार की निजी संपत्ति नहीं है। उसकी सुरक्षा में लापरवाही की शिकायतों को गंभीरता से लेना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अब देखना होगा कि जिला खनिज विभाग मौके पर जांच कर तथ्यों को सामने लाता है या इन सवालों के जवाब के लिए शिकायतकर्ता को एक और आवेदन देना पड़ेगा।