शिक्षा के मंदिर में प्राचार्य पर गंभीर आरोप, महिला कर्मचारियों ने खोला मोर्चा

तपस गुप्ता

Reporter | Updated: 29 Oct 2026, 08:19 AM IST | 1 min read
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उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

शिक्षा के मंदिर में विद्यार्थियों को अनुशासन, संस्कार और सम्मान का पाठ पढ़ाया जाता है, लेकिन जब उसी संस्थान के भीतर जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति की कार्यशैली को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आएं, तो मामला विभागीय जांच का विषय बन जाता है। बिरसिंहपुर पाली स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के प्राचार्य पप्पू लाल मीणा के खिलाफ महिला शिक्षिकाओं एवं महिला कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। प्राचार्य की कार्यशैली और कथित दुर्व्यवहार से नाराज कर्मचारियों ने विद्यालय के मुख्य गेट के सामने बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। इसके साथ ही पाली थाने पहुंचकर शिकायत पत्र भी सौंपा। मामले ने विद्यालय की कार्यप्रणाली और महिला कर्मचारियों के सम्मानजनक कार्य वातावरण को लेकर गंभीर चर्चा छेड़ दी है।

महिला कर्मचारियों ने लगाए गंभीर आरोप

महिला कर्मचारियों की ओर से राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति (NESTS), नई दिल्ली की आयुक्त को भेजे गए शिकायत पत्र में प्राचार्य के व्यवहार को लेकर कई बिंदु उठाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, महिला शिक्षिकाओं को बार-बार कार्यालय में बुलाना, निर्धारित कार्य समय के बाद भी देर तक बैठाना और बातचीत के दौरान व्यक्तिगत टिप्पणियां करना जैसी परिस्थितियों से उन्हें असहजता का सामना करना पड़ता है।

शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि महिला शिक्षिकाओं की कक्षाओं में अचानक पहुंचकर विद्यार्थियों के सामने टोकना और अध्यापन पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करना उनके सम्मान को प्रभावित करता है। वहीं, गर्ल्स हॉस्टल में पर्याप्त पूर्व सूचना और समुचित समन्वय के बिना पहुंचने को लेकर छात्राओं की निजता एवं सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया है।

परीक्षा प्रभारी के साथ कथित अभद्रता ने बढ़ाई गंभीरता

शिकायत में परीक्षा प्रभारी महिला शिक्षिका के साथ कथित अभद्र व्यवहार का मामला भी शामिल है। आरोप है कि प्रश्नपत्रों की छपाई के लिए प्रिंटर उपलब्ध कराने को लेकर विवाद के दौरान प्राचार्य ने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इसके बाद परीक्षा संबंधी रजिस्टर फेंकने और संबंधित शिक्षिका के प्रति धमकी भरी टिप्पणियां करने का आरोप भी लगाया गया है।

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, रजिस्टर फेंकने की घटना विद्यालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो सकती है। ऐसे में संबंधित फुटेज और दस्तावेजों को सुरक्षित रखकर जांच करना महत्वपूर्ण है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले में निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

गेट पर प्रदर्शन से थाने तक पहुंचा मामला

महिला शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर की और पुलिस को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने पूरे प्रकरण की गोपनीय एवं निष्पक्ष जांच, संबंधित कर्मचारियों के स्वतंत्र बयान दर्ज करने तथा शिकायतकर्ताओं पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं डालने की मांग उठाई है।

प्राचार्य का पक्ष सामने नहीं आया

प्राचार्य पप्पू लाल मीणा से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन वह कैमरे के सामने आने से बचते नजर आए। इस कारण उनका पक्ष दर्ज नहीं हो सका। आरोपों की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उनका आधिकारिक पक्ष भी सामने आना आवश्यक है।

विद्यालय में महिला कर्मचारियों की गरिमा, छात्राओं की निजता और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना संस्थागत जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्राचार्य जैसे जिम्मेदार पद पर आसीन व्यक्ति से भी मर्यादित एवं पेशेवर व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग का परीक्षण और संबंधित पक्षों के बयान इस मामले में आगे की कार्रवाई का आधार बनेंगे।