जब रीवा भी रहा मध्य प्रदेश की राजधानी! जानिए विंध्य की रियासत से नए राज्य के गठन तक का इतिहास
रीवा का इतिहास केवल विंध्य क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मध्य भारत के राजनीतिक पुनर्गठन से भी जुड़ा हुआ है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है कि रीवा को 1 नवंबर 1956 को गठित मध्य प्रदेश की राजधानी नहीं बनाया गया था। रीवा तत्कालीन विंध्य प्रदेश की राजधानी था, जो मध्य प्रदेश के गठन से पहले एक अलग प्रशासनिक इकाई थी। इसी ऐतिहासिक तथ्य के कारण रीवा को लेकर अक्सर भ्रम पैदा होता है।
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रीवा रियासत से विंध्य प्रदेश की राजधानी बनने तक का सफर
रीवा लंबे समय तक बघेल राजवंश की रियासत की राजधानी रहा। रीवा जिला प्रशासन की ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार, बघेल शासकों के शासनकाल में रीवा का राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व बढ़ा। वर्ष 1597 में रीवा को तत्कालीन रीवा रियासत की राजधानी के रूप में स्थापित किया गया था। इसके बाद यह क्षेत्र बघेलखंड की प्रमुख राजनीतिक शक्ति के रूप में जाना जाने लगा।
भारत की आजादी से पहले रीवा एक देशी रियासत थी। यहां बघेल राजवंश का शासन था। महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव रीवा रियासत के अंतिम शासकों में शामिल थे। आजादी के बाद देशी रियासतों को एकीकृत करने की प्रक्रिया शुरू हुई, ताकि छोटे-छोटे राज्यों के स्थान पर व्यवस्थित प्रशासनिक इकाइयां बनाई जा सकें।
1948 में बना विंध्य प्रदेश, रीवा को मिली राजधानी
रीवा के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ वर्ष 1948 में आया। 4 अप्रैल 1948 को विंध्य प्रदेश के पुनर्गठन की प्रक्रिया के तहत बघेलखंड और बुंदेलखंड की 35 रियासतों को मिलाकर विंध्य प्रदेश बनाया गया। रीवा इस नए राज्य का प्रमुख केंद्र बना और इसकी राजधानी बनाया गया। महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव को राजप्रमुख की भूमिका मिली, जबकि अवधेश प्रताप सिंह विंध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
विंध्य प्रदेश में रीवा के अलावा सतना, सीधी और बुंदेलखंड के कई क्षेत्र शामिल थे। उस समय यह एक अलग प्रशासनिक इकाई थी। 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने के बाद विंध्य प्रदेश को भाग-सी राज्य का दर्जा मिला। वर्ष 1952 के पहले आम चुनाव के बाद पंडित शंभूनाथ शुक्ल विंध्य प्रदेश के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री बने।
1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश का गठन
देश में राज्यों के पुनर्गठन की प्रक्रिया के तहत संसद ने राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 पारित किया। इसके प्रावधानों के अनुसार 1 नवंबर 1956 को नए मध्य प्रदेश राज्य का गठन हुआ। इसमें तत्कालीन मध्य प्रदेश, मध्य भारत, भोपाल और विंध्य प्रदेश के क्षेत्रों को शामिल किया गया। इस विलय के बाद रीवा की राजधानी के रूप में पहचान समाप्त हुई और वह नए मध्य प्रदेश का हिस्सा बन गया।
नए मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल बनी। इस प्रकार यह कहना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं होगा कि रीवा 1956 में गठित मध्य प्रदेश की राजधानी था। सही तथ्य यह है कि रीवा, 1948 से 1956 तक विंध्य प्रदेश की राजधानी रहा था।
आज रीवा विंध्य क्षेत्र का प्रमुख संभागीय मुख्यालय है। उसका यह इतिहास बताता है कि कभी बघेल राजवंश की रियासत की राजधानी रहा यह शहर आजादी के बाद एक अलग राज्य की राजधानी भी बना और फिर आधुनिक मध्य प्रदेश के प्रशासनिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों में शामिल हो गया।



