उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले के बिरसिंहपुर पाली संजय गांधी ताप विद्युत गृह, बिरसिंहपुर पाली के सिविल संभाग क्रमांक-2 में पदस्थ कार्यपालन अभियंता राम आश्रय शर्मा से जुड़ा विवाद अब विभागीय कार्यप्रणाली और निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है। ठेकेदार नीरज मिश्रा ने ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव को शिकायत भेजकर अभियंता पर मारपीट, अभद्रता, धमकी देने और निविदा प्रक्रिया में दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, मुख्य अभियंता एच.के. त्रिपाठी की ओर से इस मामले में कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
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कार्यालय में मारपीट और टी-शर्ट फाड़ने का आरोप
ठेकेदार नीरज मिश्रा के मुताबिक, 5 अक्टूबर 2026 को सिविल संभाग क्रमांक-2 के कार्यालय में निविदा संबंधी काम के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। शिकायत में कार्यपालन अभियंता राम आश्रय शर्मा पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने, मारपीट करने और टी-शर्ट फाड़ने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्हें निविदा नहीं मिलने देने और झूठे प्रकरण में फंसाने की धमकी भी दी गई।
नीरज मिश्रा ने यह भी कहा है कि घटना में उनके बाएं पैर में चोट आई, जबकि उस पैर का पहले ऑपरेशन हो चुका था और टांके भी लगे थे। उन्होंने चिकित्सकीय परीक्षण कराए जाने का उल्लेख करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इन आरोपों पर संबंधित अभियंता का पक्ष सामने आना शेष है।
निविदा की जांच व्यवस्था पर क्यों उठे सवाल
शिकायत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सिविल कार्यों की निविदा संबंधी प्रक्रिया और कोटेशन की जांच व्यवस्था से जुड़ा है। नीरज मिश्रा के अनुसार, पहले सिविल विभाग की निविदाओं से संबंधित जांच प्रक्रिया अधीक्षण अभियंता (क्रय एवं कार्य) के कार्यालय से संचालित होती थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि पिछले वर्ष मिली शिकायत के बाद यह व्यवस्था लागू की गई थी, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
लेकिन आरोप है कि अप्रैल 2026 से पावर हाउस परिसर के सिविल कार्यों की एनक्वायरी जारी करने और खोलने का काम फिर कार्यपालन अभियंता (सिविल)-2 के कार्यालय से होने लगा। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस व्यवस्था में कुछ पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया जा रहा है और अन्य ठेकेदारों पर अपने कोटेशन वापस लेने के लिए दबाव बनाया जाता है। उन्होंने फोन पर गाली-गलौज और मारपीट की धमकी दिए जाने के आरोप भी लगाए हैं।
ये आरोप गंभीर हैं। यदि जांच में इनकी पुष्टि होती है, तो यह केवल किसी एक ठेकेदार का विवाद नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी निर्माण कार्यों में प्रतिस्पर्धा, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा मामला बन सकता है।
मुख्य अभियंता एच.के. त्रिपाठी की भूमिका पर सवाल
मामले में मुख्य अभियंता एच.के. त्रिपाठी की भूमिका को लेकर भीu सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता की मांग है कि प्रकरण को सामान्य विवाद मानकर नजरअंदाज करने के बजाय वरिष्ठ स्तर पर इसकी जांच कराई जाए। विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल शिकायत प्राप्त करना नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच कर उचित निर्णय लेना भी है।
यदि शिकायत विभाग के संज्ञान में पहुंच चुकी है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि जांच के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, संबंधित अभिलेख सुरक्षित किए गए हैं या नहीं और शिकायतकर्ता को क्या जानकारी दी गई है। फिलहाल, मुख्य अभियंता की ओर से इस प्रकरण में कार्रवाई किए जाने या नहीं किए जाने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए उनकी भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष जांच और विभाग के आधिकारिक पक्ष के बाद ही निकाला जा सकता है।
सीसीटीवी फुटेज और निविदा रिकॉर्ड की जांच की मांग
नीरज मिश्रा ने प्रमुख सचिव से स्वतंत्र एवं वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज, निविदा दस्तावेजों, कोटेशन, कार्यालयीन अभिलेखों और घटना के समय मौजूद व्यक्तियों के बयान जांच में शामिल करने का अनुरोध किया है। साथ ही, शिकायतकर्ता पर किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाने और आरोप प्रमाणित होने पर नियमानुसार विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की गई है।
अब सवाल यह है कि ऊर्जा विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है। क्या निविदा प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच होगी| क्या मारपीट और धमकी के आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल की जाएगी| और क्या विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय होगी?
इन सवालों का जवाब जांच और आधिकारिक कार्रवाई से ही सामने आएगा। फिलहाल, ठेकेदार की शिकायत ने सिविल संभाग क्रमांक-2 की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।



