Singrauli News: रेलवे रैक से ट्रकों तक संदिग्ध गतिविधियों की चर्चा, प्रशासनिक निगरानी पर प्रश्नचिह्न

By: Editor

On: Sunday, June 14, 2026 9:54 AM

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सिंगरौली। जिले में देश की ऊर्जा राजधानी कहे जाने वाले सिंगरौली जिले में एक बार फिर कोयला कारोबार से जुड़ा मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। गोरबी-महदेईया रेलवे साइडिंग और महावीर कोल वॉशरी को लेकर क्षेत्र में यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि कोयले में छाई (चारकोल) मिलाकर बड़े पैमाने पर परिवहन किया जा रहा है। लगातार उठ रहे सवालों ने मामले को गंभीर बना दिया है।

 

स्थानीय लोगों और क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार वॉशरी परिसर तथा रेलवे साइडिंग के आसपास छाई (चारकोल) को अलग-अलग स्थानों पर एकत्र किए जाने की चर्चा है। आरोप है कि बाद में इस सामग्री को कोयले के साथ मिलाकर ट्रकों और रेलवे रैक के माध्यम से विभिन्न औद्योगिक इकाइयों तक भेजा जाता है। क्षेत्र में लंबे समय से इस कथित गतिविधि को लेकर चर्चाएं चल रही हैं और लोग इसे “छाई का खेल” के नाम से संबोधित कर रहे हैं।

 

संगठित नेटवर्क की आशंका

क्षेत्रीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि यह कार्य किसी एक व्यक्ति या वाहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित तंत्र सक्रिय हो सकता है। परिवहन, लोडिंग और सप्लाई की प्रक्रिया सुनियोजित ढंग से संचालित किए जाने की बातें सामने आ रही हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल अवैध परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कोयले की गुणवत्ता से समझौता, सरकारी राजस्व को संभावित नुकसान और संसाधनों के दुरुपयोग जैसे गंभीर पहलुओं से भी जुड़ सकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस स्तर पर कथित तौर पर यह गतिविधियां संचालित होने की चर्चा है, उसके बावजूद अब तक किसी बड़ी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

 

रेलवे रैक से ट्रकों तक संदिग्ध गतिविधियों की चर्चा

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि रेलवे साइडिंग क्षेत्र में रैक से कोयले की निकासी और ट्रकों की आवाजाही के दौरान कई बार संदिग्ध गतिविधियां देखी गई हैं। लोगों का कहना है कि यदि पूरे परिवहन तंत्र की निष्पक्ष जांच की जाए तथा वाहनों की लोडिंग, वजन, परिवहन रिकॉर्ड और डिस्पैच दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि रात के समय कुछ वाहनों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन लगातार उठ रहे आरोपों ने प्रशासनिक एजेंसियों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है।

 

गुणवत्ता पर पड़ सकता है प्रभाव

कोयला क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि कोयले में छाई या अन्य निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री मिलाई जाती है तो इससे कोयले की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ताप विद्युत परियोजनाओं और औद्योगिक इकाइयों में गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कोयले की आपूर्ति अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। मिश्रित या निम्न गुणवत्ता वाला कोयला उत्पादन क्षमता, ऊर्जा दक्षता और मशीनों के प्रदर्शन पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। इसी कारण कोयला आपूर्ति श्रृंखला में गुणवत्ता नियंत्रण और नियमित परीक्षण को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में यदि आरोप सही साबित होते हैं तो इसका प्रभाव स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर औद्योगिक क्षेत्र तक पड़ सकता है।

 

जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर उठे सवाल

मामले को लेकर रेलवे प्रशासन, खनिज विभाग, परिवहन विभाग, एनसीएल प्रबंधन तथा जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नियमित निरीक्षण, दस्तावेजों का सत्यापन, वजन परीक्षण और गुणवत्ता जांच की प्रभावी व्यवस्था होने पर इस प्रकार की कथित गतिविधियां लंबे समय तक संचालित नहीं हो सकतीं। लोगों का मानना है कि संबंधित विभागों को पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि क्षेत्र में फैल रही चर्चाओं और आशंकाओं पर विराम लग सकें!

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