ओपीडी में डॉक्टर नदारद, फार्मासिस्ट के दवा लिखने का आरोप।
### चार डॉक्टरों की पदस्थापना के बावजूद मरीजों को नहीं मिल रहा समुचित उपचार, परिजनों ने व्यवस्था पर उठाए सवाल
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(सीधी)। सीधी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझौली में स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल में ओपीडी के दौरान डॉक्टरों की अनुपस्थिति और फार्मासिस्ट द्वारा मरीजों की दवा पर्ची लिखे जाने का मामला सामने आया है। मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब अस्पताल में चार डॉक्टर पदस्थ हैं, तो मरीजों को समय पर चिकित्सकीय परामर्श क्यों नहीं मिल रहा है।
क्षेत्रीय विधायक के प्रयासों से अस्पताल में चार डॉक्टरों की पदस्थापना की गई है, लेकिन इसके बावजूद ओपीडी में डॉक्टरों की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में विधायक के प्रयासों पर भी जिम्मेदारों की लापरवाही से पानी फिरता नजर आ रहा है।
### मौसमी बीमारियों के चलते बढ़ी मरीजों की संख्या
बरसात के मौसम में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने से अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। ऐसे समय में मरीजों को डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता और बेहतर उपचार की जरूरत है। लेकिन ओपीडी में डॉक्टरों की अनुपस्थिति की शिकायतों से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
### मीडिया टीम के पहुंचने पर परिजनों ने बताई परेशानी
सोमवार, 28 सितंबर को सुबह करीब 11 बजे जब मीडिया टीम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझौली पहुंची, तो कई मरीजों के परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि ओपीडी में डॉक्टरों के बजाय फार्मासिस्ट दवा पर्ची लिख रहे हैं। ऐसे में मरीजों को उचित उपचार मिलने का भरोसा नहीं हो पा रहा है।
परिजनों का कहना है कि यदि डॉक्टर मरीजों की जांच कर दवा लिखें, तो उन्हें उपचार को लेकर संतुष्टि और भरोसा रहेगा। वहीं, एक अन्य परिजन ने कहा कि चार डॉक्टरों की पदस्थापना के बावजूद ओपीडी में कम से कम एक डॉक्टर की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जानी चाहिए।
### मरीजों के परिजनों ने सुनाई आपबीती
रामरती पनिका, मरीज की परिजन ने बताया कि वह अपने मरीज को लेकर अस्पताल आई थीं। ओपीडी में मरीज की बीमारी बताने पर एक व्यक्ति ने दवा पर्ची लिखी। बाद में बाहर आने पर पता चला कि दवा पर्ची लिखने वाले डॉक्टर नहीं, बल्कि फार्मासिस्ट हैं। इससे उन्हें चिंता हुई कि मरीज को सही उपचार मिल पाएगा या नहीं।
विजय बहादुर सिंह, मरीज के परिजन ने बताया कि वह इस भरोसे के साथ मझौली अस्पताल आए थे कि यहां एमबीबीएस डॉक्टर मरीज की जांच कर उपचार लिखेंगे। लेकिन ओपीडी में डॉक्टर के बजाय फार्मासिस्ट द्वारा दवा पर्ची लिखे जाने से उन्हें संतुष्टि नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने मरीज का उपचार कराया।
### सीबीएमओ ने दी सफाई
इस संबंध में डॉ. दीपक सिंह, सीबीएमओ मझौली ने बताया कि अस्पताल में चार डॉक्टर पदस्थ हैं और सभी शिफ्ट के अनुसार ड्यूटी करते हैं। ओपीडी के दौरान डॉक्टर बैठते हैं, लेकिन कभी-कभी एमएलसी और वार्ड में मरीजों की जांच के लिए जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में फार्मासिस्ट मरीजों को सुझाव देते हैं, दवा पर्ची नहीं लिखते हैं।
### बड़ा सवाल: चार डॉक्टरों की पदस्थापना के बाद भी मरीज क्यों परेशान?
खंड मुख्यालय के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में यदि मरीजों को डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब देखना होगा कि अस्पताल प्रबंधन ओपीडी में डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाता है।



