इंदौर के पीथमपुर में नौकरी कर रहे युवक को सपने में दिखीं माता, गांव लौटकर पहाड़ पर खोज निकाली माँ की आकृति,दर्शन के लिए उमड़े हजारों श्रद्धालु
भवरसेन पहाड़ में नीम के पेड़ के नीचे माता की आकृति मिलने का दावा, दुर्गम पहाड़ी पर पहुंचने के लिए रास्ता नहीं होने से श्रद्धालुओं को हो रही परेशानी
Also Read
सीधी जिले के रामपुर नैकिन जनपद पंचायत क्षेत्र के भवरसेन के पहाड़ की ऊंचाई पर एक पत्थर में माता की आकृति दिखाई देने की जानकारी सामने आने के बाद श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। जहाँ नवरात्रि के दौरान शुरू हुई इस घटना को ग्रामीण आस्था से जोड़कर देख रहे हैं। वही दावा है कि इंदौर के पीथमपुर में नौकरी करने वाले एक व्यक्ति बसंत लाल सिंह गोंड़ को लगातार सपने आने के बाद मा काली की यह आकृति मिली। जहाँ अष्टमी से शुरू हुआ श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला नवमी और दशहरे तक हजारों की भीड़ में बदल गया।
सपने में मिली जानकारी, गांव लौटकर की तलाश
रामपुर नैकिन तहसील के ग्राम छिरोही निवासी बसंत लाल सिंह गोंड़ ने बताया कि वह पीथमपुर में रहकर नौकरी करते थे। जहा करीब एक साल से उन्हें माता से संबंधित अनुभव होने का दावा उन्होंने किया है, लेकिन उन्होंने बताया कि इस बार नवरात्रि के पहले दिन से लगातार सपने आने और बेचैनी बढ़ने लगी। उनका कहना है कि सपनों में माता उन्हें अपने स्थान पर आने के लिए कहती थीं। इसो वजह से इसके उनका काम में मन नहीं लग रहा था और वह दो-तीन दिन नौकरी पर भी नहीं गए।
बसंत सिह ने यह भी बताया कि नवरात्रि की चौथी तिथि को फिर सपना आया, जिसके बाद उन्होंने 13 अक्टूबर को पीथमपुर से गांव के लिए वे निकल लिए और 14 अक्टूबर को घर पहुंचे। अगले दिन 15 अक्टूबर को वह उस स्थान पर पहुंचे, जहां सपने में माता के होने की बात बताई गई थी। जहाँ उन्होंने नीम के पेड़ के नीचे काफी देर तक तलाश की और उसी दिन एक पत्थर में माता की आकृति दिखाई देने का दावा किया। वही इसके बाद उन्होंने स्नान कर जल से अभिषेक किया और माता का श्रृंगार किया।
पत्थर में दिखाई दे रही आंख और नाक
शिकारगंज गांव के रहने वाले शैलेंद्र सिंह ने बताते है कि उन्हें दशहरे के दिन इस स्थान की जानकारी मिली। इसके बाद वह परिवार के साथ दर्शन करने पहुंचे। उनके अनुसार उस पत्थर के निचले हिस्से में आंख और नाक जैसी आकृति दिखाई देती है, जिसे श्रद्धालु माता का स्वरूप मान रहे हैं।
दुर्गम पहाड़ी पर पहुंचना चुनौती
हलाकि स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थान पहाड़ के ऊपरी हिस्से में स्थित है, जिसकी ऊंचाई लगभग 300 से 400 फीट बताई जा रही है। यहां तक पहुंचने के लिए सुगम रास्ता नहीं होने की वजह से श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके बावजूद वही आसपास के गांवों से महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। हक्काकी यह स्थान क्षेत्र में आस्था और कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।



