गांव के स्कूल से MPPSC टॉपर तक: प्रिया पाठक की कहानी, मेहनत से हासिल किया प्रशासनिक सेवा में पहला स्थान
सतना की बेटी ने बढ़ाया विंध्य का मान, अब सीधी में प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ जनसेवा की चुनौती | दो विषयों में गोल्ड मेडल और सिविल सेवा परीक्षा में टॉप रैंक ने बनाया युवाओं के लिए प्रेरणा
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मध्य प्रदेश के सतना जिले की रहने वाली डिप्टी कलेक्टर प्रिया पाठक की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखते हैं। गांव से शुरुआती पढ़ाई करने वाली प्रिया ने अपनी मेहनत, लगन और निरंतर अध्ययन के दम पर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की राज्य सेवा परीक्षा 2019 में डिप्टी कलेक्टर पद के लिए पहला स्थान हासिल किया। आज वह सीधी जिले में प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभा रही हैं। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता उन्हें विंध्य क्षेत्र की चर्चित युवा प्रशासनिक अधिकारियों में शामिल करती हैं।
साधारण शुरुआत, लेकिन लक्ष्य बड़ा
प्रिया पाठक की सफलता का सफर स्कूली शिक्षा से ही शुरू हो गया था। उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव में हुई। इसके बाद उन्होंने नवोदय विद्यालय से 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने जबलपुर का रुख किया, जहां रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद इंदौर में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की।
खास बात यह रही कि प्रिया ने उच्च शिक्षा के दौरान भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। मीडिया में प्रकाशित उनकी सफलता की कहानियों के अनुसार, उन्होंने स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर गोल्ड मेडल हासिल किए। यह उपलब्धि बताती है कि उनकी सफलता केवल प्रतियोगी परीक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि पढ़ाई के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता का परिणाम भी है।
DSP से डिप्टी कलेक्टर तक, सफलता के लिए नहीं छोड़ा लक्ष्य
प्रिया पाठक की कहानी का एक और प्रेरक पहलू यह है कि उन्होंने एक से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की। वर्ष 2020 की राज्य सेवा परीक्षा में उनका चयन उप पुलिस अधीक्षक (DSP) पद के लिए हुआ था। इसके बाद वर्ष 2019 की परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित हुआ, जिसमें उन्होंने डिप्टी कलेक्टर पद के लिए शीर्ष स्थान प्राप्त किया। यानी एक उपलब्धि मिलने के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना जारी रखा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रिया पाठक ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, शिक्षकों और मित्रों के सहयोग को दिया। वह भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी टीना डाबी से भी प्रेरित रही हैं। उनकी यात्रा युवाओं को यह संदेश देती है कि लक्ष्य स्पष्ट हो और तैयारी निरंतर हो, तो कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफलता की राह बनाई जा सकती है।
सीधी में जनसेवा की जिम्मेदारी, शहर की व्यवस्थाओं पर नजर
सीधी जिले में प्रिया पाठक की भूमिका अब केवल राजस्व प्रशासन तक सीमित नहीं है। उन्हें नगर पालिका परिषद सीधी के मुख्य नगर पालिका अधिकारी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इस पद के साथ शहर की सफाई, पेयजल, सड़क, जल निकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की चुनौती भी जुड़ी है।
जून 2026 में उनके नेतृत्व में नगर पालिका, राजस्व और नजूल विभाग की संयुक्त टीम द्वारा शासकीय कन्या महाविद्यालय के सामने सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की खबर भी सामने आई थी। यह उनके प्रशासनिक कार्यों से जुड़ा एक उदाहरण है।
प्रिया पाठक की उपलब्धियों को केवल परीक्षा में मिली रैंक से नहीं, बल्कि वर्तमान जिम्मेदारियों और जनहित के कार्यों से भी देखा जाना चाहिए। शहर के नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी बनाना उनके सामने महत्वपूर्ण दायित्व हैं।
युवाओं के लिए संदेश: सफलता किसी एक दिन का परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण का प्रतिफल होती है। सतना से निकलकर प्रदेश की राज्य सेवा परीक्षा में शीर्ष स्थान हासिल करने और सीधी में प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने तक का प्रिया पाठक का सफर इसी बात की मिसाल है।



