पेड़ कटाई का विरोध करने वाले नागा साधु को भी ‘खरीदने’ की कोशिश? डिप्टी रेंजर पर आरोप

मनोज शुक्ला सम्पादक

Editor | Updated: 26 Oct 2026, 05:56 AM IST | 1 min read
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विकास के नाम पर हरियाली पर वार! पनमसा धाम में पेड़ कटने के आरोप, वन विभाग की कार्रवाई पर सवाल

रामपुर नैकिन में 9 लाख के सामुदायिक भवन निर्माण के लिए सागौन और सेंधा के पौधे काटने का आरोप, वन विभाग ने पीओआर दर्ज कर कार्रवाई की दी जानकारी

सीधी। जिले के रामपुर नैकिन नगर पंचायत अंतर्गत पनमसा धाम में करीब 9 लाख रुपये की लागत से बन रहे सामुदायिक भवन का निर्माण कार्य पेड़ों की कटाई के आरोपों के चलते विवादों में आ गया है। निर्माण कार्य में सेंटरिंग के लिए जंगल में लगे सागौन और सेंधा के पौधों को काटकर बल्ली के रूप में इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। मामले में वन विभाग की निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।

पनमसा धाम के महंत बालक दास जी महाराज के अनुसार, रीवा के ठेकेदार शिव प्रसाद पटेल द्वारा करीब पांच से छह वर्ष पुराने पौधों को कटवाकर निर्माण कार्य में उपयोग किया गया। स्थानीय स्तर पर सेंधा के 22 और सागौन के 11 पौधे काटे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, कटे हुए पौधों की वास्तविक संख्या और कटाई की वैधता की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

सूचना के बाद कार्रवाई में देरी का आरोप

महंत बालक दास जी महाराज का आरोप है कि उन्होंने स्वयं पेड़ों की कटाई की सूचना वन विभाग को दी थी, लेकिन करीब 10 दिन बीतने के बावजूद उन्हें जिम्मेदारों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली। उन्होंने स्थानीय वन अमले की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि संबंधित कर्मचारियों और ठेकेदार के बीच मिलीभगत हो सकती है। महंत ने यह भी दावा किया कि उन्हें पैसे देकर शिकायत से पीछे हटने के लिए कहा गया था। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित कर्मचारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

वन विभाग ने दी कार्रवाई की जानकारी

डिप्टी रेंजर राजनेस सिंह ने बताया कि मामले में पीओआर (प्राथमिक अपराध रिपोर्ट) दर्ज करने और संबंधित सामग्री जब्त कर कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है। वहीं, रेंजर अधिकारी नवीन सिंह बघेल ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

पीओआर दर्ज होना वन विभाग की प्रारंभिक कार्रवाई का हिस्सा है। इससे आरोपों की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, लेकिन दोष तय होना और जिम्मेदारों पर अंतिम कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

अब सवाल यह है कि यदि निर्माण कार्य में अवैध रूप से पेड़ों की कटाई हुई है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कब होगी? साथ ही, वन विभाग यह स्पष्ट करेगा कि कितने पौधे काटे गए, सामग्री कहां से लाई गई और सूचना मिलने के बाद कार्रवाई में देरी क्यों हुई? मामले में पारदर्शी जांच से ही आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकेगी।

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