पशु चिकित्सा 1912डायल, एंबुलेंस में निजी दवाओं का मामला गरमाया।
डॉक्टर श्रीकांत जायसवाल ने निजी दवाओं के इस्तेमाल की बात स्वीकार की, अधिकारी ने बताया पर्याप्त हैं सरकारी दवाएं
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सीधी जिले की कुसमी तहसील में पशुओं के उपचार के लिए संचालित डायल 1912 पशु चिकित्सा एंबुलेंस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पशुपालकों ने एंबुलेंस सेवा के दौरान निर्धारित शुल्क से अधिक पैसे लेने की शिकायत की है। मामला मीडिया तक पहुंचने के बाद एंबुलेंस में निजी दवाओं के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा पशुपालकों को आपातकालीन पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डायल 1912 एंबुलेंस सेवा संचालित की जा रही है। निर्धारित 150 रुपये शुल्क के बाद नियमानुसार पशुपालकों को उपचार में आवश्यक सरकारी दवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जानी हैं।
मीडिया से चर्चा के दौरान एंबुलेंस में पदस्थ चिकित्साकर्मी डॉ. श्रीकांत जायसवाल ने बताया कि यदि सरकारी दवाएं उपलब्ध नहीं होती हैं, तो पशुपालकों को निजी दवाएं दी जाती हैं और उनका पैसा लिया जाता है। उनके इस बयान से एंबुलेंस में निजी दवाओं के इस्तेमाल की बात सामने आई है।
वहीं, कुसमी पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह ने बताया कि उनके पास दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता है और पशुपालकों को नियमानुसार दवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब विभाग के पास सरकारी दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, तो एंबुलेंस में निजी दवाओं का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया जा रहा है? क्या निजी दवाएं देने से पहले पशुपालकों को इसकी जानकारी और सहमति दी जाती है? साथ ही, निर्धारित शुल्क से अधिक राशि लेने की शिकायतों की जांच कौन करेगा?
अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर एंबुलेंस में उपलब्ध दवाओं का रिकॉर्ड, उपचार पर्चियां और शुल्क वसूली की जानकारी जांचें। इससे स्पष्ट हो सकेगा कि पशुपालकों से अतिरिक्त राशि लेने की शिकायतों में कितनी सच्चाई है।
सरकारी योजना का उद्देश्य पशुपालकों को राहत देना है, न कि उन्हें दवाओं और शुल्क को लेकर असमंजस में डालना। विभागीय अधिकारियों को शिकायतों की जांच कर पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि सरकारी पशु चिकित्सा सेवा पर लोगों का भरोसा बना रहे।



