जनपद भवन निर्माण में मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल,बिना सुरक्षा इंतजाम के मजदूरों से काम कराने का आरोप

अमित श्रीवास्तव

Reporter | Updated: 26 Oct 2026, 01:23 AM IST | 0 min read
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4 करोड़ के जनपद भवन निर्माण में मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल,बिना सुरक्षा इंतजाम के काम कराने का आरोप*

**कुसमी में निर्माण स्थल पर न सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था, न ठेका कंपनी की जानकारी का बोर्ड; मजदूरों के पंजीयन और मजदूरी भुगतान को लेकर भी उठे सवाल**

*कुसमी, सीधी।**

सीधी जिले के कुसमी जनपद पंचायत में करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे जनपद भवन के निर्माण कार्य में मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के अनुसार, निर्माण स्थल पर सुरक्षा के जरूरी इंतजामों का अभाव है। वहीं, मजदूरों ने दावा किया है कि उनका नाम ठेका कंपनी की सूची में दर्ज नहीं है। मजदूरी भुगतान में मनमानी और तकनीकी अमले की अनुपस्थिति में निर्माण कार्य कराए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।

*## सुरक्षा उपकरणों के बिना काम करने का आरोप*

निर्माण स्थल पर काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षा हेलमेट, सेफ्टी शूज, सुरक्षा बेल्ट और अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध होना जरूरी है। विशेषकर ऊंचाई पर काम करने के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करना आवश्यक है। लेकिन मजदूरों के मुताबिक, उन्हें जरूरी सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। ऐसे में किसी दुर्घटना की स्थिति में मजदूरों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

मजदूरों के लिए स्वच्छ पेयजल, प्राथमिक उपचार, विश्राम की व्यवस्था और आपातकालीन सहायता जैसी बुनियादी सुविधाएं भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। निर्माण स्थल पर इन व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति की जांच आवश्यक है।

*## ठेका कंपनी और मजदूरों के पंजीयन पर सवाल*

निर्माण स्थल पर किस कंपनी को ठेका दिया गया है, निर्माण कार्य की जिम्मेदारी किस एजेंसी के पास है और कार्य की तकनीकी निगरानी कौन कर रहा है, इसकी जानकारी देने वाला स्पष्ट सूचना बोर्ड नहीं लगाए जाने की बात भी सामने आई है। मजदूरों का दावा है कि ठेका कंपनी की सूची में उनका नाम दर्ज नहीं है। यदि यह दावा सही पाया जाता है, तो संबंधित एजेंसी के श्रमिक रिकॉर्ड, पंजीयन और मजदूरी भुगतान की जांच की जानी चाहिए।

निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों को निर्धारित नियमों के अनुसार मजदूरी, कार्यस्थल पर सुरक्षा और लागू श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले लाभ उपलब्ध कराना संबंधित नियोक्ता एवं जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही है।

*## तकनीकी अमले की मौजूदगी पर भी उठे सवाल*

स्थानीय लोगों ने निर्माण स्थल पर तकनीकी अमले की नियमित मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे शासकीय भवन में निर्माण की गुणवत्ता, कार्य की निगरानी और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए।

*## कलेक्टर और एसडीएम से जांच की मांग*

क्षेत्रीय लोगों ने जिला कलेक्टर और कुसमी एसडीएम का ध्यान इस मामले की ओर आकृष्ट कराते हुए निर्माण स्थल का निरीक्षण कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि मजदूरों की सुरक्षा और उनके अधिकारों से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यदि जांच में लापरवाही, श्रम नियमों का उल्लंघन या मजदूरी भुगतान में अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार ठेका एजेंसी और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

**अब सवाल यह है कि करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे जनपद भवन में मजदूरों की सुरक्षा, पंजीयन, मजदूरी भुगतान और तकनीकी निगरानी की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है?