हाट बाजारों में माटी शिल्पियों को मिलेगा निःशुल्क स्थान, कर वसूली पर रोक..
कलेक्टर विकास मिश्रा ने स्थानीय निकायों को दिए निर्देश, पारंपरिक शिल्प और शिल्पकारों की आजीविका को मिलेगा बढ़ावा..
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संजय सिंह मझौली सीधी
जिले के पारंपरिक माटी शिल्पकारों को अपने उत्पादों के विक्रय के लिए अब हाट बाजारों में उचित स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। कलेक्टर विकास मिश्रा ने इस संबंध में निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होने वाले हाट बाजारों में माटी शिल्पियों को सुविधाजनक स्थान दिया जाए तथा उनसे किसी प्रकार की कर वसूली नहीं की जाए।
मिट्टी से दीपक, मूर्तियां, खिलौने और सजावटी सामग्री बनाने वाले कुम्हार समुदाय के शिल्पकारों की आजीविका मुख्य रूप से इन उत्पादों की बिक्री पर निर्भर करती है। नवरात्रि और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान मिट्टी से निर्मित वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में विक्रय के लिए उपयुक्त स्थान और शुल्क से राहत मिलने से शिल्पकारों को अपने उत्पादों की बिक्री के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
कलेक्टर ने संबंधित स्थानीय निकायों को निर्देशित किया है कि हाट बाजारों में माटी शिल्पियों के लिए स्थान निर्धारित करते समय उनकी सुविधा के साथ बाजार की यातायात व्यवस्था का भी ध्यान रखा जाए। विक्रय स्थलों का चयन इस प्रकार किया जाए कि बाजार में आवागमन बाधित न हो। शिल्पकारों से स्टॉल अथवा विक्रय स्थल के लिए किसी भी प्रकार का कर नहीं लिया जाएगा।
इस पहल से जिले की पारंपरिक माटी कला को प्रोत्साहन मिलने के साथ स्थानीय शिल्पकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, मिट्टी से बने पारंपरिक उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देकर स्थानीय कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि त्योहारों के दौरान स्थानीय माटी शिल्पियों द्वारा तैयार किए गए दीपक, मूर्तियां और अन्य उत्पाद खरीदें। स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने से पारंपरिक शिल्प को संरक्षण मिलेगा और कुम्हार समुदाय के परिवारों की आजीविका को मजबूती मिलेगी।



