कैमूर पहाड़ की दरारों पर सियासत की नजर! जनता पूछ रही सवाल—नेता जी, वीडियो कब तक बनाएंगे, समाधान कब .

राजू गुप्ता (स्टेट हेड)

Reporter | Updated: 18 Oct 2026, 01:55 PM IST | 1 min read
Share:

कैमूर पहाड़ की दरारों पर सियासत की नजर! जनता पूछ रही सवाल—नेता जी, वीडियो कब तक बनाएंगे, समाधान कब दिलाएंगे?

सीधी जिले के सिहावल विधानसभा क्षेत्र में बहरी-अमिलिया से हनुमना को जोड़ने वाले स्टेट हाईवे पर संकट बरकरार, भूस्खलन से क्षतिग्रस्त सड़क का निर्माण धीमी गति से होने का आरोप; निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदारी पर भी उठ रहे सवाल

सीधी/सिहावल। कैमूर पहाड़ में भूस्खलन से क्षतिग्रस्त सड़क आज भी क्षेत्रीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। सड़क की बदहाल स्थिति, निर्माण कार्य की धीमी गति और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, इस समस्या को लेकर क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के नेताओं की सक्रियता भी चर्चा में है। ऐसे में जनता के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या नेताओं की सक्रियता केवल वीडियो बनाने और जनता के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराने तक सीमित रहेगी, या फिर सड़क की समस्या का स्थायी समाधान भी कराया जाएगा?

बहरी-अमिलिया से उत्तर प्रदेश के हनुमना को जोड़ने वाले स्टेट हाईवे पर लगातार बारिश के चलते कैमूर पहाड़ के कई हिस्सों में भूस्खलन हुआ था। कोदौरा से पिपराही के बीच करीब चार स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई थी। इसके बाद से इस मार्ग से आवागमन करने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण होने के कारण सड़क की बदहाली का असर आम लोगों की आवाजाही पर भी पड़ रहा है।

धीमी रफ्तार से चल रहा निर्माण, कब मिलेगी राहत?

जानकारी के अनुसार, बहरी-अमिलिया से हनुमना तक सड़क का निर्माण जीवीआर कंपनी द्वारा कराया गया था और टोल टैक्स भी इसी कंपनी द्वारा वसूले जाने की बात कही जा रही है। अब कैमूर पहाड़ में क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत का काम कराया जा रहा है, लेकिन निर्माण कार्य की गति को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी सामने आ रही है। लोगों का अनुमान है कि यदि काम इसी रफ्तार से चलता रहा तो सड़क को पूरी तरह दुरुस्त होने में लंबा समय लग सकता है।

क्षतिग्रस्त पहाड़ी हिस्सों के निर्माण पर लगभग एक करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान जताया जा रहा है। हालांकि, निर्माण की वास्तविक लागत, जिम्मेदार एजेंसी और कार्य पूरा करने की निर्धारित समय-सीमा की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि जनता को पता चल सके कि सड़क का काम कब तक पूरा होगा।

निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल, जिम्मेदार कौन?

सड़क मरम्मत के दौरान निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि पहले कराए गए कुछ कार्य टिकाऊ साबित नहीं हुए और कुछ समय बाद ही स्थिति फिर बिगड़ गई। यदि ऐसा हुआ है, तो इसकी तकनीकी जांच कराना जरूरी है। आखिर निर्माण में कहां कमी रह गई? क्या निर्धारित मानकों के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है? क्या संबंधित इंजीनियरों और अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जा रहा है?

निर्माण कार्य में राखड़ के अधिक इस्तेमाल की भी शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि निर्माण में लगभग 95 प्रतिशत राखड़ का उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि नहीं हुई है। पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन से प्रभावित सड़क का निर्माण सुरक्षा और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप होना बेहद जरूरी है। इसलिए संबंधित विभाग को सामग्री की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की जांच कर स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।

नेताओं की सक्रियता पर सवाल—समाधान की पहल कहां है?

कैमूर पहाड़ की क्षतिग्रस्त सड़क अब केवल आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों की जवाबदेही का मुद्दा भी बनती जा रही है। सड़क की बदहाली के बीच विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का मौके पर पहुंचकर वीडियो बनाना और जनता के सामने समस्या उठाना चर्चा का विषय है।

लोकतंत्र में जनसमस्याओं को उठाना विपक्ष और सत्तापक्ष, दोनों की जिम्मेदारी है। लेकिन जनता यह भी जानना चाहती है कि मौके पर पहुंचने के बाद संबंधित नेताओं ने विभागीय अधिकारियों से क्या चर्चा की? निर्माण कार्य की समय-सीमा तय कराने के लिए क्या कदम उठाए? गुणवत्ता की जांच और स्थायी समाधान के लिए किस स्तर पर मांग रखी गई?

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस मुद्दे पर राजनीतिक सक्रियता बढ़ने की संभावना के बीच जनता के मन में यह सवाल स्वाभाविक है कि सड़क की समस्या के समाधान के लिए ठोस पहल कौन करेगा। केवल मौके पर पहुंचकर वीडियो बनाने से लोगों की परेशानी दूर नहीं होगी। जरूरत है कि राजनीतिक दल इस मुद्दे को संबंधित विभाग के समक्ष मजबूती से उठाएं और कार्य की प्रगति पर लगातार नजर रखें।

पहले सोन नदी पुल, अब कैमूर पहाड़ की परेशानी

क्षेत्र के लोगों को इससे पहले सोन नदी पुल बंद होने के दौरान भी आवागमन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। अब कैमूर पहाड़ में सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि इस महत्वपूर्ण मार्ग को जल्द सुरक्षित और सुचारु बनाया जाए, ताकि उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले यात्रियों सहित क्षेत्र के आम नागरिकों को राहत मिल सके।

अब जवाबदेही तय करने का समय

कैमूर पहाड़ में क्षतिग्रस्त सड़क का स्थायी समाधान कब होगा? निर्माण कार्य पूरा करने की समय-सीमा क्या है? गुणवत्ता की जांच कौन करेगा? यदि पहले किए गए कार्य में तकनीकी खामी पाई जाती है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी? और सबसे अहम सवाल—क्या क्षेत्र के राजनीतिक दल जनता की इस समस्या के समाधान के लिए एकजुट होकर पहल करेंगे?

इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग, निर्माण एजेंसी और जनप्रतिनिधियों को देना चाहिए। जनता को आश्वासन या वीडियो से अधिक सुरक्षित सड़क, गुणवत्तापूर्ण निर्माण और समयबद्ध समाधान की जरूरत है। अब देखना होगा कि कैमूर पहाड़ की इस समस्या पर उठने वाली आवाजें धरातल पर कितना असर दिखाती हैं और लोगों को राहत कब तक मिल पाती है।