मंत्री की बहन और जिला पंचायत सदस्य को पुलिस ने सीट बेल्ट लगाने के लिए रोका तो कहां अभद्रता की

मनोज शुक्ला सम्पादक

Editor | Updated: 10 Oct 2026, 05:19 AM IST | 0 min read
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मंत्री की बहन और जिला पंचायत सदस्य पूजा सिंह कुशराम पर पद का रौब दिखाने के आरोप, सीट बेल्ट की समझाइश पर पुलिस को घेरा

जमोड़ी में वाहन चेकिंग के दौरान हुआ विवाद, एएसआई रजनीश सिंह बघेल पर लगाए अभद्रता के आरोप; सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, नियमों के पालन को लेकर उठे सवाल

सीधी। यातायात नियमों का पालन कराने के लिए की जा रही वाहन चेकिंग के दौरान जिला पंचायत सदस्य पूजा सिंह कुशराम और जमोड़ी थाना पुलिस के बीच विवाद का मामला सामने आया है। राज्य मंत्री राधा सिंह की बहन पूजा सिंह कुशराम ने एएसआई रजनीश सिंह बघेल पर अभद्रता के आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किया है। हालांकि, एएसआई का कहना है कि उन्होंने केवल सीट बेल्ट लगाने की समझाइश दी थी और कोई चालान भी नहीं काटा गया।

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात करीब 8 बजे पूजा सिंह कुशराम अपने पति के साथ सीधी स्थित वृद्धाश्रम में जन्मदिन मनाने जा रही थीं। इसी दौरान जमोड़ी थाने के पास वाहन चेकिंग में उनकी गाड़ी रोकी गई। पूजा का आरोप है कि एएसआई रजनीश सिंह बघेल ने उनके और उनके पति के साथ अभद्रता की। उन्होंने वीडियो में यह भी दावा किया कि पुलिसकर्मी ने पहले गाड़ी की नेमप्लेट देखी, जिस पर जिला पंचायत सदस्य और भाजपा का उल्लेख था, फिर उन्हें यातायात नियमों का पाठ पढ़ाया।

सीट बेल्ट की समझाइश पर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

पूजा सिंह कुशराम ने वीडियो में सवाल उठाया कि यदि जनप्रतिनिधि के साथ ऐसा व्यवहार होता है, तो आम नागरिकों के साथ पुलिस कैसा व्यवहार करती होगी। उन्होंने इस घटना से आहत होने की बात कही और जनप्रतिनिधियों के समक्ष शिकायत भी की।

दूसरी ओर, एएसआई रजनीश सिंह बघेल ने आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि जिले में यातायात नियमों के पालन के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसी के तहत वाहन चेकिंग के दौरान पूजा सिंह कुशराम को सीट बेल्ट लगाने के लिए कहा गया था। उनके मुताबिक, न तो चालान काटा गया और न ही किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई की गई, बल्कि केवल नियमों के पालन की समझाइश दी गई।

जनप्रतिनिधि होने से नियमों में छूट मिलनी चाहिए?

यह मामला अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। पूजा सिंह कुशराम राज्य मंत्री राधा सिंह की बहन और जिला पंचायत सदस्य हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या किसी जनप्रतिनिधि या राजनीतिक परिवार से जुड़े व्यक्ति को यातायात नियमों के पालन की समझाइश दिए जाने पर पुलिस की कार्रवाई पर सार्वजनिक सवाल उठाना उचित है?

हालांकि, पद का नाजायज फायदा उठाने का आरोप अभी साबित नहीं हुआ है। फिलहाल, पूजा सिंह कुशराम और एएसआई के बयानों में अंतर है। घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों के तथ्यों का सत्यापन जरूरी है।