सिहोलिया गौशाला में अव्यवस्थाओं का आरोप, तीन साल में 50 से अधिक गोवंशों की मौत का दावा
100 से अधिक मवेशियों के लिए चारा-पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं, ग्रामीणों ने एसडीएम से की शिकायत; जांच और कार्रवाई का मिला आश्वासन
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सीधी। जिले के सिहावल जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सिहोलिया में बनी गौशाला में व्यवस्थाओं की कमी को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला का निर्माण हुए करीब तीन साल हो चुके हैं, लेकिन यहां गोवंशों के लिए पर्याप्त चारा, पानी और देखरेख की व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों ने दावा किया है कि गौशाला में अब तक 50 से अधिक गोवंशों की मौत हो चुकी है।
जानकारी के अनुसार, सिहोलिया की गौशाला में वर्तमान में 100 से अधिक मवेशी रखे गए हैं। गौशाला की देखरेख सरपंच सावित्री देवी जायसवाल कर रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गोवंशों की संख्या अधिक होने के बावजूद उनके खाने-पीने की समुचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है। इसके कारण मवेशियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
चारा-पानी की कमी से गोवंश परेशान
गांव के निवासी रामकिशोर दुबे ने बताया कि गौशाला का निर्माण तो करा दिया गया है, लेकिन मवेशियों की देखरेख के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। उनके अनुसार, गौशाला में गाय-बैल रखे गए हैं, लेकिन समय पर पानी और चारे की व्यवस्था नहीं हो पाती। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि भूख-प्यास के कारण गोवंशों की मौत हो रही है। हालांकि, इन मौतों के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
सरपंच ने बताई बजट की कमी
इस मामले में सरपंच सावित्री देवी जायसवाल का कहना है कि शासन की ओर से बहुत कम राशि मिलती है, जिसके कारण अधिक कर्मचारियों की व्यवस्था करना संभव नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से गोवंशों की देखभाल और आवश्यक व्यवस्थाएं करने का प्रयास किया जाता है। साथ ही, उन्होंने शासन से गौशाला की व्यवस्थाओं पर ध्यान देने की जरूरत बताई।
एसडीएम से जांच की मांग
गौशाला की अव्यवस्थाओं से नाराज ग्रामीणों ने फोन के माध्यम से एसडीएम राकेश शुक्ला से शिकायत की है। ग्रामीणों ने गौशाला की स्थिति की जांच कराकर गोवंशों के लिए पर्याप्त चारा-पानी और नियमित देखरेख सुनिश्चित कराने की मांग की है। शिकायत के बाद एसडीएम की ओर से जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
अब देखना होगा कि जांच में गौशाला की व्यवस्थाओं को लेकर क्या स्थिति सामने आती है और गोवंशों की देखभाल के लिए जिम्मेदार व्यवस्था में कब तक सुधार किया जाता है।



