सीधी के संजय टाइगर रिजर्व में पेड़ पर चढ़ने की कोशिश करता दिखा त्रिशूल बाघ, इवनिंग सफारी के दौरान रोमांचित हुए पर्यटक
शांत स्वभाव के कारण यह घने जंगलों में रहता है मेल टाइगर त्रिशूल
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मध्य प्रदेश के सीधी जिले के आदिवासी अंचल क्षेत्र के संजय टाइगर रिजर्व में वन्यजीव प्रेमियों को एक बार फिर रोमांचक नजारा देखने को मिला है। यहां इवनिंग सफारी के दौरान एक मेल टाइगर त्रिशूल एक पेड़ पर चढ़ने का प्रयास करता हुआ दिखाई दिया। जहाँ बाघ की इस गतिविधि को देखकर पर्यटक रोमांचित हो उठे। वही इस दौरान त्रिशूल काफी देर तक पेड़ के आसपास मौजूद रहा और पेड़ पर चढ़ने की कोशिश करता नजर आया। जहाँ यह बाघ की इस अनोखी गतिविधि का वीडियो अब सोशल मीडिया पर चर्चा में है।
मिली जानकारी के अनुसार संजय टाइगर रिजर्व में एक अक्टूबर से सफारी की बुकिंग दोबारा शुरू की गई थी। जहाँ इसके बाद त्रिशूल को पर्यटकों द्वारा देखे जाने का यह खास मौका माना जा रहा है। यहाँ बाघ जो त्रिशूल है इसको शांत स्वभाव का बाघ बताया जाता है, जो आमतौर पर घने जंगलों में रहना पसंद करता है। जहाँ वह पर्यटकों और वाहनों से दूरी बनाए रखता है, जिसके चलते उसे सफारी के दौरान अक्सर देख पाना आसान नहीं होता है।और यही वजह है कि इस बार उसका खुले स्थान पर दिखाई देना पर्यटकों के लिए खास अनुभव बन गया।
जिले के संजय टाइगर रिजर्व के डीएफओ राजेश कन्ना टी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस साल सफारी शुरू होने के बाद से ही पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। कई पर्यटक तो पहले से ही ऑनलाइन बुकिंग कराकर जंगल सफारी का आनंद लेने आते हैं। जहाँ यह शुक्रवार सुबह वायरल हुआ यह वीडियो गुरुवार की इवनिंग सफारी के दौरान बनाया गया था, जब पर्यटकों को त्रिशूल दिखाई दिया।
संजय टाइगर रिजर्व के क्षेत्र में जंगल सफारी के दौरान बाघों के अलावा अन्य वन्यजीवों को देखने का अवसर भी मिलता है। यहाँ घने साल और बांस के जंगल, प्राकृतिक जलस्रोत तथा विविध वन्यजीव इस क्षेत्र को खास बनाते हैं। जहाँ त्रिशूल का यह वीडियो जंगल के भीतर वन्यजीवों की स्वाभाविक गतिविधियों को करीब से देखने का एक रोमांचक उदाहरण है।
संजय टाइगर रिजर्व में कौन-कौन से वन्यजीव हैं?
बात करें इस सफारी की तो संजय-दुबरी टाइगर रिजर्व सीधी जिले के प्रमुख वन्यजीव क्षेत्रों में शामिल है। यहां बाघ के अलावा तेंदुआ, स्लॉथ भालू, चीतल, नीलगाय, चिंकारा, सांभर, चौसिंगा, बार्किंग डियर, जंगली सूअर, जंगली कुत्ता (धोल), लकड़बग्घा, सियार, लोमड़ी, भेड़िया, जंगली बिल्ली और साही जैसे वन्यजीव यहाँ बहुतायत मात्रा मे पाए जाते हैं। यहां अजगर सहित सरीसृपों और अनेक पक्षी प्रजातियों की भी मौजूदगी है।
वही वन विभाग की उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में 32 स्तनधारी, 152 पक्षी, 11 सरीसृप, 3 उभयचर और मीठे पानी की मछलियों की 34 प्रजातियां दर्ज हैं।



