13 घंटे थाने के बाहर डटे रहे ग्रामीण, एफआईआर की मांग पर पुलिस ने दिया कार्रवाई का भरोसा

तपस गुप्ता

Reporter | Updated: 04 Oct 2026, 09:39 AM IST | 1 min read
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उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

जिले के पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गिठोरी में बजरंग पावर इस्पात लिमिटेड के अधिकारियों-कर्मचारियों और ग्रामीणों के बीच विवाद के बाद आदिवासी महिला-पुरुषों का आंदोलन करीब 13 घंटे तक चला। ग्रामीणों ने कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाली-गलौज, अभद्रता और मारपीट के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। देर रात पुलिस के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हुआ, लेकिन कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है।

बजरंग पावर इस्पात लिमिटेड को शासन की ओर से कोल आवंटन मिलने के बाद ग्राम गिठोरी क्षेत्र में कोयला उत्खनन से जुड़ी तैयारियां की जा रही हैं। इसी दौरान कंपनी के अधिकारियों-कर्मचारियों और ग्रामीणों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। ग्रामीणों के मुताबिक, कहासुनी के बाद मामला बढ़ गया और मारपीट की स्थिति निर्मित हो गई।

घटना के बाद आदिवासी महिला-पुरुष अपनी शिकायत लेकर पाली थाना पहुंचे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों ने महिलाओं के साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया। इसके बाद ग्रामीणों ने थाने के बाहर बैठकर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।

ग्रामीणों का आंदोलन सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ और रात करीब 12 बजे तक जारी रहा। करीब 13 घंटे तक महिला और पुरुष थाने के बाहर डटे रहे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग थी कि विवाद में शामिल बजरंग पावर इस्पात लिमिटेड के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए।

आंदोलन के दौरान पुलिस ने संबंधित महिला को अस्पताल भेजकर उसका मेडिकल लीगल केस (एमएलसी) कराया। इसके बाद पुलिस द्वारा मामले में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। पुलिस के आश्वासन के बाद देर रात ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त कर दिया। हालांकि, आंदोलन खत्म होने के बावजूद एफआईआर दर्ज होने की मांग तत्काल पूरी नहीं होने से ग्रामीणों में असंतोष बना हुआ है।

मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने भी ग्रामीणों के समर्थन में पुलिस से कार्रवाई की मांग की। नेताओं ने कहा कि यदि आरोपों की जांच के बाद कंपनी के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीणों के साथ दोबारा आंदोलन किया जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने अधिकारों और सम्मान को लेकर आवाज उठा रहे हैं। वहीं, अब पूरे मामले में पुलिस की जांच और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं। आरोपों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में किन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।