उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
पाली थाना क्षेत्र के ग्राम गिठोरी में बजरंग पावर इस्पात लिमिटेड के अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच हुए विवाद का मामला अब पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंच गया है। कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण और कांग्रेस नेता एसपी कार्यालय पहुंचे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की। स्थिति को देखते हुए पुलिस कार्यालय के बाहर बैरिकेडिंग कर पुलिस बल तैनात किया गया।
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कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष पाली रवि मिश्रा और आदिवासी कांग्रेस जिला अध्यक्ष मनीष सिंह बड़करे के नेतृत्व में ग्रामीण एवं कांग्रेस कार्यकर्ता एसपी कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि गिठोरी में हुए विवाद में कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगाए गए आरोपों की जांच कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। करीब एक से दो घंटे तक ग्रामीण अपनी मांग को लेकर डटे रहे।
मौके पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश शर्मा ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण पुलिस अधीक्षक से मुलाकात करने की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद एसपी विजय बघवानी ने ग्रामीणों से चर्चा की और मामले में जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया।
एसपी विजय बघवानी ने बताया कि ग्राम गिठोरी के ग्रामीणों की ओर से शिकायत प्राप्त हुई है। सुमित्रा सहित अन्य लोगों ने भी कथित अभद्र व्यवहार को लेकर आवेदन दिया है। मामले की जांच के लिए डीएसपी विजय परस्ते को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एसपी के अनुसार, संबंधित महिला का मेडिकल कराया गया था, जिसमें कोई जाहिरा चोट सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले की जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो विधि अनुसार कार्रवाई की जाएगी और सभी साक्ष्य उपलब्ध होने पर जांच दो से तीन दिन में पूरी की जा सकती है।
वहीं कंपनी के कर्मचारियों की ओर से भी ग्रामीणों के खिलाफ शिकायतें प्राप्त होने की बात एसपी ने कही। पुलिस के अनुसार कुछ लोगों के शरीर पर चोट के निशान भी बताए गए हैं, जिसके आधार पर प्रकरण दर्ज किया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मामले में ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं, जो मौके पर मौजूद नहीं थे। इस पर एसपी ने आश्वासन दिया कि घटना में शामिल नहीं पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ अनावश्यक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
कोल ब्लॉक की साइट विजिट को लेकर ग्रामीणों में आशंका
एसपी ने बताया कि क्षेत्र में कंपनी को नौ कोल ब्लॉक आवंटित हुए हैं। कंपनी के अधिकारी अपनी साइट के निरीक्षण और विजिट के लिए क्षेत्र में आते रहते हैं। ग्रामीणों में आशंका थी कि उनकी जमीनों पर भी कंपनी कब्जा कर सकती है और उन्हें बेदखल किया जा सकता है। इसी आशंका के बीच विवाद की स्थिति बनी।
फिलहाल पुलिस ने जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया है, जबकि ग्रामीण एफआईआर की मांग पर कायम हैं। अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर मामले का अगला रुख निर्भर करेगा।



