कालरी पर सियासत का धुआं! 51 ट्रांसफर ने बढ़ाई हलचल, कांग्रेस का बाजार बंद का ऐलान, भाजपा बोली- खदान

तपस गुप्ता

Reporter | Updated: 02 Oct 2026, 12:43 PM IST | 1 min read
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उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

कोयले की धरती उमरिया में अब कालरी को लेकर सियासत भी गरम हो गई है। ऐतिहासिक उमरिया कालरी और चपहा खदान के भविष्य को लेकर कांग्रेस ने जहां आंदोलन का ऐलान कर दिया है, वहीं भाजपा ने खदान बंद होने की आशंका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इसी बीच चपहा खदान से करीब 51 कर्मचारियों के इधर-उधर ट्रांसफर किए जाने की बात ने पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया है।

मामला तब सुर्खियों में आया जब कांग्रेस नेता त्रिभुवन प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उमरिया कालरी को नगर के रोजगार, व्यापार और युवाओं के भविष्य का आधार बताते हुए नागरिकों से इसे बचाने के लिए एकजुट होने की अपील की।

कांग्रेस की पोस्ट में आरोप लगाया गया कि उमरिया कॉलरी में लाखों टन कोयला उपलब्ध होने के बावजूद केंद्र सरकार और एसईसीएल प्रबंधन की कथित हठधर्मिता, मनमानी और लापरवाही के कारण खदान को बंद करने की साजिश रची जा रही है। पोस्ट में दावा किया गया कि श्रमिकों को इधर-उधर किया जाना इसी दिशा में उठाया गया कदम है।

चपहा खदान से लगभग 51 लोगों के ट्रांसफर का उल्लेख करते हुए कांग्रेस ने खदान के भविष्य को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि खदान बंद होने का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उमरिया के व्यापारियों, छोटे कारोबारियों और आम लोगों की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ेगा।

3 अक्टूबर को बाजार बंद, अजय सिंह के नेतृत्व में आंदोलन

कांग्रेस नेता की पोस्ट के अनुसार, खदान को बचाने के लिए नागरिकों ने पूर्व विधायक अजय सिंह के नेतृत्व में आंदोलन का निर्णय लिया है। इसके तहत व्यापारियों से 3 अक्टूबर को सुबह 9 से 11 बजे तक अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर सांकेतिक आंदोलन में शामिल होने की अपील की गई है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि कांग्रेस की इस अपील का व्यापारियों के बीच कितना असर दिखाई देता है। दो घंटे का यह सांकेतिक बंद कालरी के मुद्दे को लेकर शहर की सड़कों पर राजनीतिक ताकत का पहला बड़ा प्रदर्शन बन सकता है।

भाजपा का पलटवार, कांग्रेस के दावे को बताया भ्रम

कांग्रेस के आरोपों के जवाब में भाजपा जिला अध्यक्ष आशुतोष अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस पर चपहा खदान बंद होने का हल्ला मचाकर व्यापारियों को डराने का आरोप लगाया।

भाजपा जिलाध्यक्ष का दावा है कि न तो खदान बंद हो रही है और न ही होगी। उन्होंने कहा कि विधायक शिवनारायण सिंह के प्रयासों से तकनीकी निदेशक स्वयं खदान का निरीक्षण कर चुके हैं और खदान बंद नहीं होने का आश्वासन दिया है।

भाजपा ने कांग्रेस के पुराने शासनकाल और उमरिया के बंद कारखानों का मुद्दा उठाते हुए भी पलटवार किया। साथ ही भाजपा कीU ओर से उमरिया के विकास के लिए नौ कोल ब्लॉक आवंटित किए जाने का दावा किया गया है। भाजपा का कहना है कि इन कोल ब्लॉकों में काम शुरू होने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

कोयले से ज्यादा गरम हुई राजनीति

कालरी को लेकर अब उमरिया में सवाल केवल कोयले का नहीं, बल्कि रोजगार, व्यापार और स्थानीय भविष्य का बन गया है। कांग्रेस 51 कर्मचारियों के ट्रांसफर और खदान बंद होने की आशंका को मुद्दा बनाकर आंदोलन की तैयारी में है, जबकि भाजपा खदान बंद नहीं होने का दावा कर रही है।

एक तरफ बाजार बंद की अपील है, दूसरी तरफ खदान बंद नहीं होने का राजनीतिक आश्वासन। ऐसे में 3 अक्टूबर को दो घंटे के लिए बंद होने वाला बाजार यह जरूर बताएगा कि कालरी के मुद्दे पर उमरिया की सियासत कितनी गरम है।