बजरंग पावर की दादागिरी,आदिवासियों की जमीन पर पेड़ कटाई का आरोप, शिकायतों के बाद भी सवाल बरकरार

तपस गुप्ता

Reporter | Updated: 28 Oct 2026, 03:06 PM IST | 1 min read
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उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

जिले के बिरसिंहपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम गिठौरी में बजरंग पावर कंपनी और आदिवासी ग्रामीणों के बीच जमीन को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्रामीणों ने कंपनी पर उनकी पुश्तैनी भूमि पर लगे पेड़ों की कथित तौर पर बिना सहमति कटाई करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब वे पेड़ काटने का विरोध करते हैं और अनुमति संबंधी जानकारी मांगते हैं, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ग्रामीणों की शिकायतों और जमीन संबंधी विवाद के बीच पेड़ कटाई की कार्रवाई किस आधार पर की जा रही है।

पुश्तैनी जमीन पर अधिकार की लड़ाई

ग्राम गिठौरी के आदिवासी समुदाय के ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में बताया है कि आरजी खसरा नंबर 42 की भूमि उनके पूर्वजों की है। इस जमीन पर उनके परिवार लंबे समय से खेती करते आ रहे हैं और यहां पेड़-पौधे भी लगे हुए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, भूमि को लेकर उन्होंने पाली न्यायालय में सिविल वाद क्रमांक 32A/2025 प्रस्तुत किया है। उनका दावा है कि जमीन से संबंधित विवाद की जानकारी होने के बावजूद बजरंग पावर कंपनी के कर्मचारी उनकी सहमति के बिना पेड़ों की कटाई कर रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने मौके पर पहुंचकर कटाई रोकने की बात कही और अनुमति के संबंध में जानकारी मांगी, तो उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। शिकायत में धमकाने जैसी बातों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

गरीब आदिवासी आखिर किसके दरवाजे पर लगाएं गुहार

ग्रामीणों का कहना है कि वे गरीब आदिवासी परिवारों से हैं और उक्त भूमि के अतिरिक्त उनके पास खेती के लिए दूसरी जमीन नहीं है। ऐसे में जमीन पर लगे पेड़ों की कटाई उनके लिए केवल पर्यावरण का सवाल नहीं, बल्कि आजीविका और पुश्तैनी अधिकारों से भी जुड़ा मामला है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि पेड़ों की कटाई तत्काल रोकी जाए और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी ने नियमों का उल्लंघन किया है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने वन विभाग को भी शिकायत पत्र सौंपा है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग मौके की जांच कर ग्रामीणों की शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं।

पुलिस तक पहुंचा मामला, जांच के लिए चौकी को शिकायत

इस संबंध में पाली थाना प्रभारी गोविंद सिंह धुर्वे ने बताया कि ग्रामीणों की ओर से शिकायत पत्र प्राप्त हुआ है। जांच के लिए आवेदन घुनघुटी चौकी भेज दिया गया है। थाना प्रभारी के अनुसार, पेड़ कटाई को लेकर ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं।

पुलिस की ओर से शिकायत जांच के लिए भेजे जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन ग्रामीणों को राहत कब मिलेगी और कथित पेड़ कटाई पर रोक लगाने के लिए क्या कार्रवाई होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

पथौरा कोल ब्लॉक और बढ़ता विवाद

भारत सरकार द्वारा आवंटित पथौरा कोल ब्लॉक, जिसमें भूमिगत और ओपनकास्ट खनन शामिल है, का उत्खनन कार्य मेसर्स बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड को मिला है। खनन परियोजना से जुड़े विवाद के बीच गिठौरी के ग्रामीणों की शिकायत ने एक बार फिर भूमि, पेड़ों और स्थानीय लोगों के अधिकारों का सवाल खड़ा कर दिया है।

इस मामले में बजरंग पावर के जीएम शशिधर द्विवेदी से पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया। उन्होंने कहा कि वह फिलहाल एक जगह बैठे हैं और बाद में बात करेंगे। उनका विस्तृत पक्ष फिलहाल सामने नहीं आया है।

अब प्रशासन की जवाबदेही की बारी

सवाल साफ है कि जब ग्रामीण जमीन पर अपना पुश्तैनी अधिकार होने का दावा कर रहे हैं, न्यायालय में मामला लंबित होने की बात कह रहे हैं और वन विभाग तथा पुलिस तक शिकायत पहुंच चुकी है, तो मौके पर पेड़ कटाई की वैधता की जांच कौन करेगा। क्या संबंधित अनुमति और दस्तावेजों की जांच कर ग्रामीणों को स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

कंपनी पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि कटाई नियमों के विरुद्ध पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि कंपनी के पास वैध अनुमति है, तो उसे संबंधित दस्तावेज और प्रक्रिया स्पष्ट करनी चाहिए। फिलहाल गिठौरी के आदिवासी ग्रामीण जवाब और कार्रवाई की उम्मीद में हैं। प्रशासन की अगली कार्रवाई तय करेगी कि उनकी शिकायत पर केवल कागजी जांच होगी या जमीन पर भी कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।