मनरेगा व ग्राम विकास की राशि चढ़ी भ्रष्टाचार की बलि…

राजू गुप्ता (स्टेट हेड)

Reporter | Updated: 31 Oct 2026, 02:24 AM IST | 1 min read
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मनरेगा व ग्राम विकास की राशि चढ़ी भ्रष्टाचार की बलि…

एक निर्माण कार्य के नाम पर भुगतान किया कई कार्यों की राशि…

कागजों में संचालित दुकान के नाम पर भुगतान किया लाखों का विल…

मामला जनपद पंचायत मझौली के ग्राम पंचायत गिजवार का…

संजय सिंह सीधी मझौली

जनपद पंचायत मझौली अंतर्गत ग्राम पंचायत गिजवार में भ्रष्टाचार की इबारत लिखी गई है।ग्रामीणों के मुताबिक यहां मनरेगा योजना एवं ग्राम विकास के बजट को जिस तरह फर्जीवाड़ा कर लाखों की राशि भुगतान की गई है उससे निर्माण एजेंसी के साथ-साथ तकनीकी अमला भी सवालों के घेरे में देखा जा रहा है। क्योंकि निर्माण कार्य की तकनीकी स्वीकृति एवं प्रगति,निगरानी तकनीकी अमला की जिम्मेदारी है अगर मौके पर निर्माण कार्य नहीं हुआ है तो कार्य का सत्यापन एवं पूर्णता प्रमाणित किस आधार पर किया गया है।

“इन कार्यों के नाम पर निकाली गई राशि”

ग्रामीणों ने बताया कि मनरेगा योजना के तहत मेढ़ बंधान कृष्ण कुमार पिता रोहिणी प्रसाद मिश्रा के खेत में,डक पोंड निर्माण अशोक पिता अनुसूइया के घर के पास,डक पोंड निर्माण अनुसुइया के घर के पास, डक पोंड निर्माण अशोक के घर के पास,डक पोंड निर्माण फुलवहा बांध के पास,डक पोंड निर्माण बैरिहाई बांध के पास,खेत तालाब निर्माण राजेंद्र पिता चूड़ामणि मिश्रा के खेत में,खेत तालाब निर्माण अनुसूया प्रसाद के खेत में खेत तालाब निर्माण रोहणी पिता रामराज मिश्रा के खेत में। इन कार्यों के नाम पर 20 लाख से ज्यादा की राशि भुगतान की गई है लेकिन जमीन में निर्माण कार्य सिर्फ एक आयताकार बावली का किया गया है जबकि विभिन्न नाम से राशि भुगतान की गई है।जबकि जमीन में ऐसे कार्य हुए ही नहीं है।

“भूमिहीनों के नाम कपिलधारा कूप एवं खेत तालाब निर्माण”

हितैषी कपिलधारा कूप निर्माण प्रभा पति सच्चिदानंद मिश्रा एवं मेढ़ बंधान बालेंद्र पिता सच्चिदानंद मिश्रा के नाम कागजों में कराया गया है जबकि दोनों हितग्राही भूमिहीन हैं।

“बिल भुगतान पर भी सवाल”

पांचवा राज्य वित्त आयोग मद एवं अन्य मद से ग्राम विकास के लिए प्राप्त बजट को सुरेश ट्रेडर्स गिजवार के नाम से लाखों रुपए का बिल भुगतान किया गया है जबकि उक्त नाम से गिजवार में कोई दुकान संचालित है ही नहीं।ग्रामीणों के मुताबिक सचिव श्यामलाल केवट के द्वारा अपने सगे संबंधी को वेंडर बनाकर फर्जी भुगतान किया गया है।
उपरोक्त कार्य एवं विल भुगतान तो एक बानगी हैं जबकि इस तरह कई फर्जी निर्माण कार्यों के नाम पर लाखों रुपए का घोटाला किया गया है।उदाहरण के तौर पर ई भुगतान क्रमांक 3951 227 दिनांक 19 जुलाई 2026 को कुल विल संख्या 22 को 238266 भुगतान किए गए हैं जबकि 22 बिल का कुल भुगतान जोड़ा जाए तो 169686 रुपए का भुगतान हुआ है शेष 68580 रुपए का हिसाब नहीं है।

“निजी पट्टे में बन गई तीन पीसीसी सड़क”

ग्रामीणों के मुताबिक निजी पट्टे की जमीन में तीन पीसीसी सड़क का निर्माण ग्राम पंचायत द्वारा कराया गया है जिसमें मेन मस्जिद से कब्रिस्तान तक,वार्ड नंबर 10 राममिलन यादव के घर से शिवरतन पनिका के घर तक एवं तेजभान सिंह के घर से कमलेश चतुर्वेदी के घर तक।

इनका कहना
ग्राम पंचायत के फर्जीवाड़ा को लेकर मेरे द्वारा आरटीआई के तहत जानकारी मांगी गई थी लेकिन फर्जीवाड़ा छिपाने के लिए वास्तविक जानकारी के बजाय गलत जानकारी दी गई है जिसकी शिकायत भी मेरे द्वारा की गई है।उपरोक्त कार्यों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया है।शासन प्रशासन से जांच कार्यवाही की मांग करते हैं।

राजेश पांडेय शिकायत कर्ता ग्रामीण

अगर इस तरह फर्जीवाड़ा किया गया है तो जांच टीम गठित की जाएगी और मैं स्वतः जाकर मौके पर जांच करूंगी।फर्जीवाड़ा पाए जाने पर कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी और राशि की वसूली भी की जाएगी।

सुरभि श्रीवास्तव सीईओ जनपद पंचायत मझौली