पूछता है सीधी… धारा-89 और 92 के आरोपी सचिव पर जिला पंचायत मेहरबान! दो ग्राम पंचायतों का वित्तीय

मनोज शुक्ला सम्पादक

Editor | Updated: 03 Nov 2026, 04:02 AM IST | 1 min read
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पूछता है सीधी…
धारा-89 और 92 के आरोपी सचिव पर जिला पंचायत मेहरबान! दो ग्राम पंचायतों का वित्तीय प्रभार देकर व्यवस्था पर उठे सवाल

आखिर जिला पंचायत की दहलीज पर भ्रष्टाचार की कहानी लिख कौन रहा है? जिम्मेदारों की भूमिका भी संदेह के घेरे में!
सीधी। जिले की पंचायत व्यवस्था में जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मामला सीधी जनपद पंचायत अंतर्गत माटा ग्राम पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है, जहां जांच में दोषी पाए जाने के बाद धारा-89 एवं धारा-92 के तहत प्रकरण दर्ज किए जाने और हर महीने 10 हजार रुपये की दर से वसूली किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद संबंधित सचिव को दो ग्राम पंचायतों का वित्तीय प्रभार सौंपे जाने से जिला पंचायत की स्थापना शाखा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत भगोहर में पदस्थ सचिव रामशरण सिंह को ग्राम पंचायत छवारी का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। यानी एक तरफ माटा ग्राम पंचायत में कथित वित्तीय गड़बड़ी के मामले में उनके विरुद्ध कार्रवाई और वसूली की प्रक्रिया चलने की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें दो ग्राम पंचायतों की वित्तीय जिम्मेदारी सौंप दी गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जिला पंचायत की स्थापना शाखा को पूर्व की कार्रवाई की जानकारी नहीं थी, या फिर जानकारी होने के बावजूद यह निर्णय लिया गया?

माटा ग्राम पंचायत के अमहा टोला में राजभान सिंह के घर के पास तालाब निर्माण का मामला भी चर्चा में है। आरोप है कि तालाब निर्माण के नाम पर राशि का आहरण कर लिया गया, लेकिन मौके पर तालाब दिखाई नहीं देता। यदि यह आरोप सही है तो आखिर सरकारी धन की निकासी किस आधार पर हुई और जिम्मेदारों से इसकी जवाबदेही कब तय होगी?

वहीं सचिव रामशरण सिंह के विरुद्ध रीवा आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में भी शिकायत किए जाने की सूचना सामने आ रही है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि होना शेष है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि धारा-89 और 92 के तहत कार्रवाई के बाद भी वित्तीय प्रभार देने का आधार क्या है? जिला पंचायत सीईओ और स्थापना शाखा इस पूरे मामले में अपना पक्ष कब स्पष्ट करेंगे?

पूछता है सीधी—क्या सरकारी धन की जवाबदेही केवल कागजों तक सीमित रह गई है, या फिर दोषियों पर वास्तव में कार्रवाई भी होगी?