उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र बिरसिंहपुर पाली में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। प्लांट के भीतर काम करने वाले ठेका श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सोमवार को ओल्ड सीएचपी क्षेत्र के नंबर-1 कन्वेयर से काम करते समय एक ठेका कर्मचारी नीचे गिर गया। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए शहडोल रेफर कर दिया गया।
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घायल कर्मचारी की पहचान रामचरण कॉल (40 वर्ष), निवासी मालियागुड़ा के रूप में हुई है। वह संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के अधीन कार्यरत ठेका कंपनी में काम करता है। बताया गया कि कर्मचारी नंबर-1 कन्वेयर पर काम कर रहा था, तभी अचानक नीचे गिर गया। ऊंचाई से गिरने के कारण उसे गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया। फिलहाल उसकी स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है।
परिजनों ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल, बिना उपकरणों के कर रहा था काम
इस हादसे के बाद घायल कर्मचारी के परिजनों ने बताया कि रामचरण ने घटना के वक्त आवश्यक सुरक्षा उपकरण नहीं पहने हुए थे। परिजनों की यह जानकारी प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। औद्योगिक संस्थान में ऊंचाई पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। इसके बावजूद यदि कोई श्रमिक बिना आवश्यक सुरक्षा इंतजामों के काम कर रहा था, तो यह ठेका कंपनी के साथ-साथ सुरक्षा निगरानी व्यवस्था की भी गंभीर विफलता मानी जाएगी।
सेफ्टी ऑफिसर नवीन दुबे की जिम्मेदारी सिर्फ पद तक सीमित
औद्योगिक संस्थान में सेफ्टी ऑफिसर का पद केवल विभागीय औपचारिकता नहीं, बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से जुड़ा होता है। ऐसे में सेफ्टी ऑफिसर नवीन दुबे की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। प्लांट में ऊंचाई पर काम कराने से पहले सुरक्षा बेल्ट, हेलमेट, सेफ्टी शूज और अन्य जरूरी उपकरणों की उपलब्धता तथा उनके इस्तेमाल की निगरानी करना सुरक्षा व्यवस्था का बुनियादी हिस्सा है।
परिजनों के मुताबिक कर्मचारी ने सुरक्षा उपकरण नहीं पहने थे। ऐसे में हादसे से पहले कार्यस्थल का सुरक्षा निरीक्षण किसने किया और बिना सुरक्षा इंतजामों के काम कैसे जारी रहा, इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
मुख्य अभियंता एचके त्रिपाठी के कार्यकाल में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के मुख्य अभियंता एचके त्रिपाठी के नेतृत्व में संचालित इस विशाल औद्योगिक संस्थान में उत्पादन और तकनीकी कार्यों के साथ कर्मचारियों की जान की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। लेकिन कन्वेयर से श्रमिक के गिरने की घटना ने प्रबंधन की सुरक्षा निगरानी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। मुख्य अभियंता के स्तर पर सुरक्षा विभाग की जवाबदेही और ठेका कंपनियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा जरूरी है।
प्लांट में नियमित रूप से मेंटेनेंस, मरम्मत और अन्य तकनीकी कार्यों के लिए ठेका श्रमिकों की सेवाएं ली जाती हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल ठेका कंपनी पर डालकर प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से अलग नहीं हो सकता। कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराना प्रबंधन की भी जिम्मेदारी है।
हादसे के बाद जांच और जवाबदेही जरूरी
रामचरण कॉल के साथ हुई घटना ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा के दावों और जमीनी व्यवस्था के बीच अंतर उजागर किया है। हादसे की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कर्मचारी को किस परिस्थिति में कन्वेयर पर काम करने भेजा गया था, आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे या नहीं और सुरक्षा निरीक्षण किस स्तर पर किया गया था।
सेफ्टी ऑफिसर नवीन दुबे और मुख्य अभियंता एचके त्रिपाठी की जवाबदेही तय किए बिना ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद करना मुश्किल है। मजदूर अपनी रोजी-रोटी के लिए जोखिम भरे कार्यस्थलों पर काम करते हैं, लेकिन उनकी जिंदगी की कीमत किसी भी उत्पादन लक्ष्य या विभागीय कार्यवाही से कम नहीं हो सकती। अब जरूरत केवल जांच के आश्वासन की नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की है।



