500 मेगावाट की यूनिट ठप, SGTPP की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल

तपस गुप्ता

Reporter | Updated: 01 Nov 2026, 06:02 AM IST | 1 min read
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उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

अपनी कार्यप्रणाली और व्यवस्थाओं को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाला संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला बिजली उत्पादन से जुड़ा है, जहां केंद्र की 500 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट बॉयलर ट्यूब में लीकेज के कारण ठप हो गई। इतनी बड़ी उत्पादन क्षमता वाली यूनिट का अचानक बंद होना न केवल विद्युत उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि संयंत्र की तकनीकी व्यवस्था, रखरखाव और निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।

जानकारी के अनुसार, बॉयलर ट्यूब में लीकेज सामने आने के बाद यूनिट को बंद करना पड़ा। ताप विद्युत केंद्र में बॉयलर महत्वपूर्ण तकनीकी हिस्सा होता है। इसमें खराबी आने से पूरी उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर नियमित निरीक्षण और रखरखाव के बावजूद बॉयलर ट्यूब में लीकेज की स्थिति कैसे बनी। क्या समय रहते तकनीकी खामी का पता नहीं लगाया जा सका या फिर रखरखाव व्यवस्था में कहीं लापरवाही हुई।

संयंत्र की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता एच.के. त्रिपाठी के नेतृत्व में संचालित हो रही है। ऐसे में 500 मेगावाट की यूनिट का बंद होना उनके प्रशासनिक और तकनीकी नेतृत्व के सामने भी एक बड़ी चुनौती है। बिजली उत्पादन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में छोटी सी तकनीकी चूक भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि यूनिट में खराबी आने के वास्तविक कारण क्या हैं और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संयंत्र प्रबंधन के पास उपकरणों के नियमित निरीक्षण और संभावित तकनीकी खराबियों को समय रहते रोकने की प्रभावी व्यवस्था है। यदि बॉयलर ट्यूब में लीकेज की आशंका पहले से थी, तो उसे नजरअंदाज क्यों किया गया। और यदि अचानक खराबी आई, तो क्या संयंत्र की निगरानी व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।

अब संयंत्र प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यूनिट को जल्द से जल्द दुरुस्त कर उत्पादन बहाल करने की है। साथ ही यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि यूनिट कितने समय तक बंद रहेगी और इस दौरान बिजली उत्पादन को हुए नुकसान का आकलन कितना है।

संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में बार-बार तकनीकी व्यवधानों की स्थिति को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब देखना होगा कि मुख्य अभियंता एच.के. त्रिपाठी इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं और क्या केवल मरम्मत तक कार्रवाई सीमित रहती है या खराबी के कारणों की जिम्मेदारी भी तय की जाती है।