उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले में रेत के कथित अवैध उत्खनन और परिवहन का मामला सामने आने के बाद खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्राम कौड़िया अंतर्गत वन कक्ष क्रमांक 28 के जंगल से रेत निकालकर परिवहन किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि वन विभाग की टीम जब इस गतिविधि को रोकने पहुंची, तो ट्रैक्टर-ट्रॉली सवार लोग भागने लगे। भागने के दौरान ट्रॉली से सड़क पर रेत गिरा दी गई। वनकर्मियों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाया है और उसके आधार पर संबंधित लोगों की पहचान की जा रही है।
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इस घटना ने खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जब जंगल से रेत निकालकर उसका परिवहन किया जा रहा था, तब खनिज विभाग का अमला कहां था। क्या विभाग को इसकी जानकारी नहीं मिली, या फिर अवैध उत्खनन और परिवहन रोकने के लिए की जा रही निगरानी केवल कागजों तक सीमित है। इन सवालों का जवाब अब विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।
वन टीम सक्रिय, खनिज विभाग की भूमिका पर सवाल
कौड़िया में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, वन कक्ष क्रमांक 28 के जंगल से रेत निकालकर ट्रैक्टर-ट्रॉली के जरिए ले जाई जा रही थी। इसी दौरान वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। टीम को देखकर वाहन सवारों ने वहां से भागने की कोशिश की और रास्ते में रेत गिरा दी। वनकर्मियों द्वारा बनाया गया वीडियो अब संबंधित लोगों की पहचान के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
यहां सवाल केवल ट्रैक्टर-ट्रॉली सवारों के भागने का नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था का भी है, जिसके तहत जिले में खनिज संपदा के अवैध उत्खनन और परिवहन पर रोक लगाई जानी चाहिए। यदि वन विभाग की टीम मौके तक पहुंच सकती है, तो खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है? क्या संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित जांच होती है? क्या संदिग्ध वाहनों पर नजर रखी जाती है।
रेत माफिया को किसका संरक्षण
जिले में अवैध रेत कारोबार की आशंका के बीच यह पता लगाना जरूरी है कि कौड़िया के जंगल से रेत कहां से निकाली गई और उसे किस स्थान पर ले जाया जा रहा था। ट्रैक्टर-ट्रॉली किसकी है, परिवहन में कौन लोग शामिल थे और क्या उनके पास आवश्यक अनुमति थी, इसकी जांच होनी चाहिए।
यदि रेत का उत्खनन और परिवहन बिना वैध अनुमति के किया जा रहा था, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है। साथ ही, यह भी जांच का विषय है कि ऐसी गतिविधियां कितने समय से चल रही थीं और संबंधित क्षेत्र में निगरानी की क्या व्यवस्था थी।
वीडियो बना, अब कार्रवाई कब
वनकर्मियों के पास घटनाक्रम का वीडियो होना जांच को आगे बढ़ाने में मददगार हो सकता है। अब जरूरत है कि वन विभाग और खनिज विभाग मिलकर मामले की जांच करें। संबंधित वाहन की पहचान की जाए, रेत के स्रोत का पता लगाया जाए और अवैध उत्खनन या परिवहन की पुष्टि होने पर कानूनी कार्रवाई की जाए।



