उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
संजय गांधी ताप विद्युत गृह एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। इस बार निशाने पर हैं विद्युत गृह के मुख्य अभियंता एच.के. त्रिपाठी। 1340 मेगावाट क्षमता वाले इस बिजलीघर में बॉयलर और टरबाइन की ओवरहॉलिंग के दौरान निकलने वाले खराब इंसुलेशन के निस्तारण में कथित लापरवाही, ठेका आवंटन में पक्षपात और आवाज उठाने वाली महिला कर्मचारी के वेतन से कटौती जैसे आरोप सामने आए हैं। दिनेश नामक आवेदक ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भोपाल को शिकायत भेजकर मामले में हस्तक्षेप और जांच की मांग की है।
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नहर और डैम किनारे फेंके जाने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, हर वर्ष ओवरहॉलिंग के दौरान बॉयलर, टरबाइन और अन्य उपकरणों से खराब इंसुलेशन निकलता है। आरोप है कि इस अपशिष्ट को निर्धारित सुरक्षित स्थान पर निस्तारित करने के बजाय सीसीडब्ल्यू पंप हाउस, नहर और डैम के किनारे खुले में फेंका जा रहा है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि मुख्य अभियंता एच.के. त्रिपाठी के कथित निर्देशन में यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है, तो पर्यावरणीय नियमों के पालन और अपशिष्ट प्रबंधन की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। जलस्रोतों, आसपास के पर्यावरण और जीव-जंतुओं पर संभावित प्रभाव की जांच भी आवश्यक है।
अनियमितताओं पर आवाज उठाने की क्या मिली कीमत
शिकायत का सबसे संवेदनशील पहलू प्रदूषण इंचार्ज केमिस्ट श्रीमती दिव्या तिवारी से जुड़ा है। आवेदक का आरोप है कि उन्होंने इंसुलेशन के कथित अनुचित निस्तारण पर आवाज उठाई, जिसके बाद उनके वेतन से 100 रुपये की आर्थिक दंड के रूप में कटौती की गई। शिकायतकर्ता ने इसे प्रताड़ना बताते हुए मुख्य अभियंता की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अब यह जांच का विषय है कि वेतन से कटौती किस आधार पर की गई, आदेश किसने जारी किया और क्या निर्धारित विभागीय प्रक्रिया का पालन हुआ।
पसंदीदा ठेकेदार को लेकर भी शिकायत
एच.के. त्रिपाठी पर शिकायतकर्ता ने अपने पसंदीदा ठेकेदार को काम दिलाने का भी आरोप लगाया है। शिकायत में कहा गया है कि आनन-फानन में टेंडर जारी कर लंबे समय से जुड़े ठेकेदार को काम सौंपा गया। यह भी दावा किया गया है कि बाहरी कंपनियों को ओवरहॉलिंग का काम मिलने के बावजूद स्थानीय स्तर पर काम उसी ठेकेदार के माध्यम से कराया जाता है। इन आरोपों की पुष्टि के लिए टेंडर की शर्तों, कार्यादेश, भुगतान रिकॉर्ड और वास्तविक कार्य निष्पादन की जांच जरूरी है।
अब जवाबदेही तय करेगा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
शिकायत की प्रतिलिपि ऊर्जा विभाग के सचिव और मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक को भी भेजी गई है। शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच और जांच प्रभावित होने की आशंका के मद्देनजर मुख्य अभियंता के स्थानांतरण की मांग की है।



