मजदूर की मौत पर उबाल, मुआवजे के लिए अड़े परिजन,कल त्रिपाठी के प्रबंधन को घेर सकते हैं ग्रामीण

तपस गुप्ता

Reporter | Updated: 03 Nov 2026, 01:55 PM IST | 1 min read
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उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

बिरसिंहपुर पाली स्थित संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र में ठेका श्रमिक की मौत के बाद आक्रोश गहराता जा रहा है। ओल्ड सीएचपी क्षेत्र के नंबर-1 कन्वेयर से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुए 40 वर्षीय रामचरण कॉल की उपचार के दौरान मौत हो गई। मंगलवार को मृतक का शव पाली स्थित उसके घर पहुंचा तो परिवार और ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई। मुआवजे की मांग को लेकर परिजन अंतिम संस्कार नहीं करने पर अड़े हैं। वहीं बुधवार को संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के बाहर विरोध प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार 2 नवंबर को मालियागुड़ा निवासी रामचरण कॉल प्लांट के ओल्ड सीएचपी क्षेत्र में नंबर-1 कन्वेयर पर काम कर रहा था। इसी दौरान अचानक नीचे गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली पहुंचाया गया, जहां से गंभीर हालत में शहडोल रेफर किया गया। बाद में श्रीराम अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। एक मजदूर की मौत ने पूरे परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है।

परिजनों के आरोप से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

मृतक के परिजनों के मुताबिक, हादसे के समय रामचरण ने आवश्यक सुरक्षा उपकरण नहीं पहने हुए थे। यह जानकारी सामने आने के बाद प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था और ठेका कंपनी की कार्यप्रणाली गंभीर चर्चा का विषय बन गई है। ऊंचाई पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षा बेल्ट, हेलमेट और अन्य आवश्यक उपकरणों का इस्तेमाल अनिवार्य सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसी स्थिति में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को सामान्य दुर्घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

एचके त्रिपाठी और नवीन दुबे की निगरानी पर सवाल

संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के मुख्य अभियंता एचके त्रिपाठी के नेतृत्व में संचालित प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। प्लांट में काम करने वाले नियमित कर्मचारियों के साथ ठेका श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी प्रबंधन का महत्वपूर्ण दायित्व है। वहीं सेफ्टी ऑफिसर नवीन दुबे की जिम्मेदारी कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन और आवश्यक उपकरणों के इस्तेमाल की निगरानी से जुड़ी है।

रामचरण की मौत के बाद इन दोनों अधिकारियों के स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और जवाबदेही निर्धारित करना जरूरी हो गया है। हादसे के समय सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे या नहीं, कर्मचारी को किस परिस्थिति में कन्वेयर पर काम कराया जा रहा था और सुरक्षा निरीक्षण किस स्तर पर हुआ था, इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

मुआवजे की मांग पर अड़े परिजन, प्रदर्शन की तैयारी

मंगलवार को शव घर पहुंचने के बाद परिजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर अंतिम संस्कार नहीं किया। ग्रामीणों में भी प्रबंधन के प्रति नाराजगी बनी हुई है। बुधवार को प्लांट के बाहर विरोध प्रदर्शन की संभावनाएं जताई जा रही हैं। परिजनों की मांग है कि मृतक के परिवार को उचित आर्थिक सहायता मिले और जिम्मेदार पक्ष की जवाबदेही तय हो।

मजदूर की जिंदगी से बड़ा नहीं उत्पादन

रामचरण कॉल की मौत ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता को सामने ला दिया है। मुख्य अभियंता एचके त्रिपाठी और सेफ्टी ऑफिसर नवीन दुबे के स्तर पर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा, ठेका कंपनी की जवाबदेही और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है।

एक मजदूर की मौत के बाद परिवार मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहा है। मजदूर अपनी मेहनत से बिजलीघर की व्यवस्था चलाने में योगदान देते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही की कीमत उनकी जान देकर नहीं चुकाई जानी चाहिए। आखिरकार किसी भी औद्योगिक संस्थान की सफलता का पैमाना केवल उत्पादन नहीं, बल्कि वहां काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षित जिंदगी भी है।